New Year लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
New Year लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
मंगलवार, 30 दिसंबर 2014
ये नव वर्ष हमें स्वीकार नहीं है
परम आदरणीय मित्र बंधुवर
ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं है
अपना ये त्यौहार नहीं है ||
अपनी ये तो रीत नहीं है
अपना ये व्यवहार नहीं है
धरा ठिठुरती है सर्दी से
आकाश में कोहरा गहरा है
बाग़ बाज़ारों की सरहद पर
सर्द हवा का ही पहरा है
सूना है प्रकृति का आँगन
कुछ रंग नहीं , उमंग नहीं
हर कोई घर में दुबका है
नव वर्ष का ये ढंग नही है
चंद मास इंतज़ार करो
निज मन में तनिक विचार करो
नये साल नया कुछ हो तो सही
क्यों नक़ल में सारी अक्ल बही
उल्लास मंद है जन -जन का
आयी है बहार अभी नहीं
ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं
अपना ये त्यौहार नहीं है
ये धुंध कुहासा छंटने दो
रातों का राज्य सिमटने दो
प्रकृति का रूप निखरने दो
फागुन का रंग बिखरने दो
प्रकृति दुल्हन का रूप धर
जब स्नेह – सुधा बरसायेगी
शस्य – श्यामला धरती माता
घर -घर खुशहाली लायेगी
तब चैत्र शुक्ल की प्रथम तिथि को
नव वर्ष मनाया जायेगा ||
आर्यावर्त की पुण्य भूमि पर
जयगान सुनाया जायेगा
युक्ति – प्रमाण से स्वयंसिद्ध
नव वर्ष हमारा हो प्रसिद्ध
आर्यों की कीर्ति सदा -सदा
नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा
अनमोल विरासत के धनिकों को
चाहिये कोई उधार नहीं
ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं
है अपना ये त्यौहार नहीं
है अपनी ये तो रीत नहीं
है अपना ये व्यवहार नहीं …………
सदस्यता लें
संदेश (Atom)