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शनिवार, 12 मई 2012

पूज्य बापू महात्मा गाँधी


Letter NO-                                                                                                  दिनांक………………………
प्रकाशनार्थ-प्रेषित
दुनिया के सर्वाधिक प्रभावशाली आंदोलनों में बापू का नमक सत्याग्रहभी
  पूज्य बापू महात्मा गाँधी एक 'बिचार' एक 'आदर्श' के बारे में चर्चा को आगे बढ़ाते हुए पार्टी प्रवक्ता डॉ.रवींद्र ने कहा जहाँ "गाँधी" एक 'बिचार' का नाम है एक 'आदर्श' का नाम है ,वहीँ "गांधी" एक आन्दोलन और एक क्रान्ति का भी नाम है .वैसे तो दुनियां में आन्दोलन बहुत हुए आपको याद भी होगा हीं. लेकिन उनमें से कुछ 10 (Ten)आन्दोलन जैसे चीन में थियानमन चौराहे के विरोध प्रदर्शन ;दक्षिण अफ्रीका में केपटाउन के परपल रेन प्रोटेस्ट ; मिस्र के राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के खिलाफ इस वर्ष जनवरी में हुए विशाल प्रदर्शन ; ईरान में 1978 के मोहर्रम विरोध प्रदर्शन और वर्ष 1986 में हुए पीपुल पॉवर विरोध प्रदर्शन  समलैंगिक अधिकारों को लेकर वर्ष 1969 में न्यूयार्क में चले स्टोनवाल आंदोलन ; वियतनाम युद्ध के खिलाफ वाशिंगटन में हुए विशाल प्रदर्शन ;वर्ष 1963 में वाशिंगटन में निकाले गये सिविल राइट मार्च’ ;समलैंगिक अधिकारों को लेकर वर्ष 1969 में न्यूयार्क में चले स्टोनवाल आंदोलन  ; 10 प्रभावशाली आंदोलनों की सूची में अमेरिकी स्वतंत्रता आंदोलन में निर्णायक भूमिका निभाने वाली बोस्टन चाय पार्टीएवं भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी की अगुवाई में हुए नमक सत्याग्रहप्रमुख हैं . अमेरिका की प्रतिष्ठित टाइम पत्रिका ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी की अगुवाई में हुए नमक सत्याग्रहको दुनिया के सर्वाधिक प्रभावशाली 10 (दस) आंदोलनों में शामिल भी किया है. वर्ष 1930 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में दांडी यात्रा के दौरान किए गए 'नमक सत्याग्रह' को टाइम ने दुनिया में सर्वाधिक प्रभावशाली व क्रांतिकारी परिवर्तन लाने वाले 10 महत्वपूर्ण आंदोलनों की सूची में दूसरे स्थान पर रखा है. बापू ने मार्च 1930 में अहमदाबाद स्थित साबरमती आश्रम से 24 दिन की यात्रा शुरू की थी. यह यात्रा समुद्र के किनारे बसे शहर दांडी के लिए थी जहां जा कर बापू ने औपनिवेशिक भारत में नमक बनाने के लिए अंग्रेजों के एकछत्र अधिकार वाला कानून तोड़ा और नमक बनाया था. इस अहिंसक आंदोलन के बाद देश में अंग्रेजी शासन के खिलाफ सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू हुआ था. उनदिनों भारत पर ब्रिटेन की लंबे समय तक चली हुकूमत कई मायने में बड़ा ही महत्वपूर्ण था . इस ब्रिटेनी हुकूमत का सम्बन्ध चाय, कपड़ा और यहां तक कि नमक जैसी वस्तुओं पर एकाधिकार कायम करने से जुड़ी थी. औपनिवेशिक हुकूमत के तहत भारतीय न तो खुद नमक बना सकते थे और न ही बेच सकते थे. उन्हें ब्रिटेन में बना और वहां से आयात किया गया महंगा नमक खरीदना पड़ता था. इस सत्याग्रह ने ब्रिटिश वर्चस्व तोड़ने के लिए भावनात्मक एवं नैतिक बल दिया था.  करिश्माई व्यक्तित्व के धनी  बापूस्वतंत्रता आंदोलन के नेता महात्मा गांधी ने अहमदाबाद शहर से छोटे से समुद्र तटीय शहर दांडी के लिये 24 दिवसीय नमक सत्याग्रह शुरू किया. इस यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में बापू के समर्थक उनके साथ जुड़ गये.  महात्मा गांधी और उपस्थित जनसमुदाय ने मिलकर समुद्र से नमक बनाया. इसकी वजह से हजारों भारतीय कुछ महीने के अंदर गिरफ्तार किये गये. इससे एक चिंगारी भड़की जो 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' में बदल गई. इसने भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष और स्वयं गांधी को 'बापू' के रूप में पारिभाषित किया. यही वो बिरोध मार्च है जिसे नमक सत्याग्रहकहा गया , और यही अंग्रेजी हुकूमत के पतन का भावनात्मक और नैतिक आधार भी है .वास्तव में यही वो आंदोलन है जिसने  भारत में जमे विदेशी हुकूमत की नींव हिला दी . आज के इस बैठक में 1.भाजपा  जिला अध्यक्ष श्री राजीव रंजन   ; पूर्व  जिला अध्यक्ष श्री कृष्ण मुरारी प्रसाद 2. भाजपा बिधायक  डॉ. आलोक रंजन 3. जिला महामंत्री  -श्री नविन कुमार पांडे; श्री क्रिशन झा ;संजीव कुंवर; 4.जिला उपाध्यक्ष श्री माधव झा; श्री कृष्ण झा;श्री  सुबोध कुमार रॉय ; बिनय कुमार झा; श्रीमती  .सावित्री सिंह ;श्रीमती. इंदु श्रीवास्तवा ; श्री रूद्र नारायण ठाकुर ; शशि ओझा; श्री दिनेश प्रसाद  यादव  ५.अल्प शंख्यक प्रकोष्ठ के संयोजक  डॉ. प्रोफ़ेसर एहशान शाम   6.  भाजपा  जिला /पार्टी -प्रवक्ता डॉ.रविन्द्र कुमार सिंह  7. मीडिया प्रभारी दिवाकर सिंह 11.जिला मंत्री -बिन्दुमोहन झा ;श्रीमति ललिता ठाकुर; मंजू चौधरी  12. जिला युवा मौर्चा अध्यक्ष राजकिशोर झा 13. नौहट्टा मंडल अध्यक्ष सह जिला परिषद् सदश्य श्री हीरेन्द्र कुमार मिश्र  हीरा  14. महिला मौर्चा अध्यक्षा श्रीमति  नमिता पाठक 15. बिपिन प्रकाश ;शिव्भुशन सिंह ;श्री चंद्रशेखेर सिंह ;संजीव सिंह ;नगर अध्यक्ष श्री बजरंग गुप्ता ;महामंत्री  कुश  कुमार मोदी ;अनोज कुमार सिंह बब्बन पवन शर्मा ; साजन शर्मा ; श्री लक्ष्मीनारायण झा ; शक्ति गुप्ता ; संतोष कुमार मुंगेरी ; मु.शमीम ; रौशन गांधी ; रंजित कुमार चौधरी ; भगवान् झा  ;रविन्द्र  कुमार झा  रंजित कुमार चौधरी  ;  फूल बाबू  ; मु. नुरुल्ला आजाद 

मंगलवार, 31 जनवरी 2012

BAPU KO SALAM

    ३० जनवरी १९४८ को "हे राम" कहते जिन प्रतिभा ने इस बिराट संसार का परित्याग किया वो कोई और नहीं बल्कि इस राष्ट्र के राष्ट्र पिता व यूँ कहें तो बीसवीं सदी के महानायक पूज्य बापू महात्मा गांधी थे. अहंकार से परे मानव सेवा और देस भक्ति के दीवाने गांधी, अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने बाले गांधी, जिनके आह्वान पर जन सैलाब उमड़ पड़ता था देस के वो सच्चे सपूत गांधी . साबरमती आश्रम में रामकृष्ण परमहंस व मदर टेरेसा की तरह आरम्भ से ही कूष्ट रोगियों की दिल से सेवा करने बाले व मरहम पट्टी करने बाले गांधी मानो जिनके कथनी और करनी में लेस मात्र भी अंतर न था और न ही कभी जिन्होंने एक गरीब माता की गरीबी को ही भुलाया बल्कि उनके गरीबी से आहात और द्रवित होकर आजीवन ही एक पतली धोती धारण करने का न केवल संकल्प लिया बल्कि निभाया भी वो गांधी . सेवा में मानो माँ की ममता सी निर्मल ह्रदय एवं निर्णय लेने में हिमालय पर्वत सा अडिग व स्थिर चित्त बाले कस्तूरबा-पति गांधी जिनके यह एलान के बाद कि,आश्रम के कोई भी लोग अधिक धन या पैसा नहीं रखेंगे .बाबजूद आदेस के कस्तूरबा गाँधी के पास से चौवान्नी निकलने के बाद आश्रम से निकाले जाने का निर्णय उनके दृढ़ता का परिचायक है. वैसे ये निर्णय काका कालेश्वर के आग्रह पर बदलनी पड़ी किन्तु आश्रम के सभी लोगों के जूठे बर्तन को धोने का निर्णय सर्व मान्य नहीं होने पर भी प्रभावी हो ही गया ,और कस्तूरबा गाँधी को सबका जूता बर्तन धोना पड़ा. ये गांधी जी के दृढ निश्चयी होने का एक और प्रमाण है . उनके शहीद होने पर आइन्स्टीन ने ठीक ही कहा था कि, आने बाले पीढ़ी को शायद यह बिस्वास नहीं ही होगा कि, गांधी जी जैसे हाड़-मांस बाले लोग २० विन सदी  में पैदा लिए होंगे .देस के प्रथम प्रधान मंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु ने जिनके शहीद होने पर अपने संदेस में कहा कि "दी लाइट हस गोन". जिनके शहीद होने पर ब्रिद्ध जनों के अनुसार आश्मान में उस समय इन्द्र धनुष उगते देखा जा रहा था जिसमे गांधी जी की छवि को लोग देख रहे थे ,ऐसे देवत्व गुण बाले राम और कृष्ण के उपासक तथा राम चरित मानस एवं गीता के अनुसार आचरण करने बाले गांधी को और उनकी के सहादत को रवींद्र का सलाम !        

रविवार, 2 अक्टूबर 2011

कोशी की महिलायें चरखा में इतने ब्यस्त हो गयी कि , गाँव में होने बाले रोज के घरेलु-झगडे ही मिट गए

             लैटर N0 A-209                  प्रकाशनार्थ                                                      02 -10 -11
२ अक्टूबर ११ पेज न० ४ पर कुंदन कुमार सहरसा द्वारा गांधी जी के संस्मरण पर लिखा गया लेख "महिलाओं ने सूत काट बापू को पहनाई थी माला" बेहद रोमांचित करने बाला है. वास्तव इस  लेख में राष्ट्र प्रेम की झलक, देस भक्तों का आचरण और गांधी का देस-प्रेम और देस भक्तों के साथ भावनात्मक लगाव को दर्शाता है. एक तरफ अंग्रेजी हुकूमत कि बर्बरता पूर्ण कार्रवाई चरम पर थी वही दूसरी ओर १९३४ के भूकंप कि घटना ने बापू के दिल को झकझोर कर रख दिया होगा और फिर अपने को नहीं रोक पाने वाले बापू  कोशी कि पीड़ा को देखने स्वयं कोशी आ पहुंचे होंगे जहाँ उनका ऐतिहाशिक स्वागत भी किया गया. इसमें एक प्रेरक प्रसंग बस इतना कि, गाँधी जी को स्वयं यहाँ कि माताओं ने अपने हाथों से चरखा चला सूत काट माला पहनायी. सूत काटकर माला पहनाये जाने कि घटना क्या घटी , कोशी की महिलायें चरखा में इतने ब्यस्त हो गयी कि , गाँव में होने बाले रोज  के घरेलु-झगडे ही मिट गए.देस भक्तों को सम्मान देने के तौर तरीके, उपहार के स्वरूपों की चर्चा बेहद ह्रदय स्पर्शी व मर्म स्पर्शी तो है ही इसके साथ ही इस प्रसंग से आत्मनिर्भरता को बल भी मिलता है. हम अपनी ओर से आपके इस आर्टिकिल & "स्वस्थ्य-बिचार" के लिए बिशेष रूप से आपको धन्यवाद देते हैं ! माता भगवती दैनिक जागरण परिवार के सभी सदस्यों के ऊपर कृपा बनाये रक्खें ! 

"रवींद्र"