प्रकृति ने और इस देश की धरती ने वह सब कुछ दिया है जिससे संसार के समस्त सजीव प्राणी अपना जीवन सहज और अत्यंत ही सरलता पूर्वक निर्वहन कर सकते हैं . बाबजूद इसके घोर आश्चर्य की बात तो ये है की लोग उपहार स्वरूप उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों से तृप्त नहीं, बल्कि मृग तृष्णा में दौड़ लगा रहे हैं . देश के बड़े-बड़े नेताओं द्वारा विदेशी बैंकों में काला-धन जमा करना अभी भी विश्व-विजेता शिकंदर बनकर उभरने जैसी मानसिकता का द्योतक है ....................................... सावधान ,गीता का अनुशरण करना ही यथेष्ट होगा ...................मनुष्य न कुछ लेकर आया है, और न ही कुछ लेकर जाएगा ............................यह भी ध्यान रहे की मृत्यु दुनिया का सर्वमान्य सत्य है ........................फिर बैंकों में पडा काला धन किसके लिए ..?
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