शुक्रवार, 24 जून 2011

विकलांगो के लिए भी हो सुरक्षित/आरक्षित-शीट(विकलांगो के लिए भी हो सुरक्षित/आरक्षित-शीट (गौरवशाली राष्ट्र के लिए मेधा हमेशा सर्वश्रेष्ठ ))

                                  

विकलांगो के लिए भी हो सुरक्षित/आरक्षित-शीट (गौरवशाली राष्ट्र के लिए मेधा हमेशा सर्वश्रेष्ठ )

                
            
         वैसे तो गुरुदेव आरक्षण कोटे में आते भी नहीं थे फिर भी एक उदाहरण के तौर पर मैं उनकी मेधाशक्ति के बदौलत उन्हें मिली कामयाबी का जिक्र अवश्य करना पसंद करूंगा . इसके साथ ही मैं जिक्र करना चाहूँगा बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर का जिनके जीवन में कामयाबी का मूल ही मेधा(MERIT) रहा है आरक्षण नहीं . अब जहाँ  गुरुदेव, “रबीन्द्र नाथ ठाकुर” अपने मेधा के बदौलत ही नोबेल पुरुष्कार से सम्मानित किये गए वहीँ बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर संबिधान-निर्माता होने का गौरव प्राप्त किये थे न की,आरक्षण के बदौलत . मेरिट को दबाने पर शायद उन्हें भी कष्ट ही होती होगी ! अब हम सबों के लिए एक यक्ष प्रश्न ;- 
             १.जातीय आधार से आरक्षण का लाभ लेकर राजनीति में या चुनावी मैदान में आकर बाजी मारना अच्छा है या फिर समाज सेवा कर पूर्ण सामाजिक परिचय लेकर चुनाव जितना या जनप्रतिनिधि के रूप में चुना जाना अच्छा है ..?  २. जातीय आधार से आरक्षण का लाभ लेकर नौकरी में आना अच्छा है या फिर, मेधा के आधार पर नौकरी में आना अच्छा है ………?  ३. नौकरी में पदोन्नति मेधा के आधार पर अच्छा या जातीय आधार पर अच्छा …..?
              निश्चय ही उपरोक्त प्रश्नों का सही और एक ही लोकतान्त्रिक जबाब होना चाहिए और वो है "मेधा"(MERIT) . मेरे बिचार से तो "मेधा' को दबाना माताओं के "गर्भपात"(ABORTION) जैसा तो है ही, साथ ही “गुरुदेव”  रबीन्द्र नाथ ठाकुर को एक अस्वस्थ्य सन्देश देने जैसा भी है..? इसके अलावा परोक्ष या अपरोक्ष रूप से यही ब्यवस्था भ्रष्टाचार की जननी भी साबित हो सकती है .
              और यदि आरक्षण की बात करे तो फिर बिक्लांग मेधावी व्यक्ति भी इसी लोकतंत्र का एक अभिन्न अंग है आखिर उनके लिए कोई सुरक्षित-शीट क्यों नहीं होती ..? उन्हें भी चुनाव-लड़ने में आरक्षण का लाभ क्यों नहीं मिलना चाहिए .....? शायद हमारे देश को और देश की खाशकर उन जनता को जिनके लिए यह ब्यवस्था दी जा रही है उन्हें भी वर्तमान ब्यवस्था पर हंशी आती होगी . या फिर एकांत चिंतन-मनन की आवस्यकता महशुश होती होगी . हम समझते हैं की वर्तमान व्यवस्था में मेधा का गला घुटा जा रहा है ,जो भारतीय लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं .
              वास्तव में आरक्षण उन तमाम भारतीय-गरीब-मेधावी छात्रों व व्यक्तियों के लिए होना चाहिए जो पैसे के अभाव में अपने प्रतिभा का सही उपयोग नहीं कर पा रहे है या फिर उन तमाम भारतीय-बिक्लांग-मेधावी छात्रों व व्यक्तियों के लिए जो मेधा के बाबजूद शारीरिक रूप से कमजोर होने के कारण राष्ट्र-निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी देने से बंचित रह जाते हैं . अब समय आ गया है जबकि सरकार को इसपर अविलम्ब  न केवल पुनर्बिचार  करना चाहिए बल्कि इसे राष्ट्र-हित में लागू भी करना चाहिए  .
              मेरे बिचार से "भारतीय-लोकतंत्र " में इस व्यवस्था पर उनको भी बिचार करना चाहिए जिन्हें इस व्यवस्था का लाभ मिल रहा है …! और इसके साथ हीं प्राप्त लाभ/पद को यह कहकर ठुकरा देना चाहिए कि ,राष्ट्र-हित में ही हमारा हित निहित है और राष्ट्र का गौरव ही हमारा गौरव . गौरवशाली राष्ट्र के लिए  "मेधा" हमेशा सर्वश्रेष्ठ है व सर्वश्रेष्ठ रहेगा और तभी “गुरुदेव” रबीन्द्र नाथ ठाकुर व बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर भी खुश होंगे …! आईये हमसब मिलकर एक नए युग का, एक नए गौरवशाली राष्ट्र का निर्माण करे .................जय हिंद ! जय भारत !
                                डॉ. रवीन्द्र कुमार सिंह
                   जिला प्रवक्ता ,भारतीय जनता पार्टी (सहरसा )
                            rabindra2166@gmail.com




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