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प्रकाशनार्थ-प्रेषित
भारतवर्ष में विद्या अध्ययन-अध्यापन प्रारंभ करने से पूर्व गुरुओं एवं शिष्यों द्वारा सरस्वती बंदना की परम्परा रही है .यह बंदना धार्मिक दृष्टि से नहीं बल्कि,सभी भारतीयों के लिए भारतीय संस्कृति का प्रतिक रहा है . किसी भी सरकार द्वारा इस परम्परा को प्रसाशनिक सतर पर बंद किया जाना सर्वथा अनुचित एवं भारतीय संश्कृति पर प्रहार है, यह सरकार का नात्सी एवं हिटलर शाही शोच का प्रतिक है .इससे भारतीय संस्कृति भले अपमानित हो लेकिन नष्ट नहीं होगी, बल्कि इस तरह के सोच का ही रखनेबालों नुकशान होगा.
डॉ.रणधीर सिंह
उपाचार्य (जंतु विज्ञान विभाग),
सहरसा
SNSRKS COLLEGE, SAHARSA
भारतवर्ष में विद्या अध्ययन-अध्यापन प्रारंभ करने से पूर्व गुरुओं एवं शिष्यों द्वारा सरस्वती बंदना की परम्परा रही है .यह बंदना धार्मिक दृष्टि से नहीं बल्कि,सभी भारतीयों के लिए भारतीय संस्कृति का प्रतिक रहा है . किसी भी सरकार द्वारा इस परम्परा को प्रसाशनिक सतर पर बंद किया जाना सर्वथा अनुचित एवं भारतीय संश्कृति पर प्रहार है, यह सरकार का नात्सी एवं हिटलर शाही शोच का प्रतिक है .इससे भारतीय संस्कृति भले अपमानित हो लेकिन नष्ट नहीं होगी, बल्कि इस तरह के सोच का ही रखनेबालों नुकशान होगा.
डॉ.रणधीर सिंह
उपाचार्य (जंतु विज्ञान विभाग),
सहरसा
SNSRKS COLLEGE, SAHARSA
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