सोमवार, 16 जनवरी 2012

नीति, नीयत और नियति

LETTER NO:- A-224                              
                   प्रकाशनार्थ- प्रेषित                                                  DATED  30 -10 -11      
        परत दर परत , नित्य नए आयाम देने में लगे आपके सहरसा के नितेश कुमार का एक और नया विस्फोट / स्किप्ट पेज न० ४/ dated ३०-१०-११ "वाह ! कालाबाजारियों को पिली बत्ती" बड़ा ही तथ्य परक और लोकतंत्र के हित में समझा जाता है.
       इनदिनों जहाँ अधिकांश लोग दीपावली और छठ पूजा में जुटे हुए हैं , प्रायः एक दुसरे को घाटों की सफाई और जगह बनाते देख रहे हैं. वही दूसरी और नितेश जी जिला आपूर्ति पदाधिकारी का नेम प्लेट एवं पिली बत्ती लगी हुयी बोलेरो में गरीबों के अनाज के काले कारोबारी व बदनाम चेहरे को सड़क पर घूमते देख रहे हैं.
        अब प्रश्न उठता है कि, आखिर ऐसा संभव है ? और यदि है तो कैसे ? नितेश जी आगे लिखते हैं . नीति, नीयत और नियति को पूरी निर्ममता से बेपर्द करता है ये घटना ..
 अर्थात, यदि नीति, नीयत और नियति ठीक रहे तो सब कुछ ठीक हो सकता है , परन्तु यही यदि ठीक नहीं रहे तो भला इसे सुधार कौन सकता है? वास्तव में नितेश जी बेहद लोकतांत्रिक और सामजिक जिम्मेदारियों को १०० % निर्वहन करने बाला उदाहरण पेस करते आ रहे हैं . मैं उनके प्रत्येक आलेख में कुछ नया , जिवंत और लोकतांत्रिक उद्धेश्यों को बर्बष पाता हूँ . उनके ह्रदय के ये भाव हमेशा उनमे बिद्ध्मान रहे , छठ पर्व के मौके पर मैं अपनी ओर से दैनिक जागरण परिवार के सभी सदस्यों को शुभकामना ब्यक्त करता हूँ ! धन्यवाद !
नोट :- इस कड़ी में कुछ पूर्व के स्क्रिप्ट आपके ध्यानाकर्षण-हेतु संलग्न :-
                                                                                                                    "रवींद्र "
                                                                                                        rabindra2166@gmail.com
                                                                                                                   9431243115 
  LETTER NO:- A-219                                                  प्रकाशनार्थ- प्रेषित                                                  DATED  20 -10 -11
                           यह कैसा इन्शाफ ?  आम जनों की अनदेखी / जमाखोर और काला बाजारियों को दी जाने बाली प्रसाशनिक सहूलियतें एक ब्रेक के बाद
          दिनाक १८ अक्तूबर २०११  को नितेस जी (दैनिक जागरण), सहरसा द्वारा लिखे "जमाखोरी व कालाबाजारी एक ब्रेक के बाद" ,शुद्धिकरण यज्ञ ,शिन क्लाईमेक्स पर, वही निर्माता ने लिया ब्रेक,फिर कहानी ने लिया यूं टर्न,वन मैन आर्मी के अंदाज में सुरु हुए शो की मशाल कैसे और क्यों बुझ गयी ? यह कुछ राजनीतिज्ञों के लिए शोध का विषय भले ही हो सकता है , किन्तु आमजन इस बात से हैरान है की, दो दिन में ११ गोदाम से हजार क्विंटल अनाज बरामद करने का दावा करने बाले प्रसाशनिक तंत्र को शान्ति ट्रेडर्स  के दो गोदाम से बरामद १४४४ बोरा अनाज गिनने में ८(आठ ) दिन कैसे लग गया ?
           फिर दिनाक १९ अक्तूबर २०११ को उन्ही नितेश कुमार (दैनिक जागरण), सहरसा द्वारा लिखित  "वाह ! बिल्ली करेगी दूध की निगरानी " यह कैसा इन्शाफ ? आरोपियों के निकट सम्बन्धियों को सौपा गया जब्त अनाज की रखवाली, कही उम्मीद की लौ जली तो कही मिली बाहबाही , कालाबाजारियों का निकलेगा दिवाला  तो गरीबों के घर मनेगी दिवाली , किन्तु एक ब्रेक के बाद प्रसाशन ने जिस प्रकार कही जब्त अनाज व बत्खारा को पुत्र के जिम्मे सौंप दिया तो कही मामा को तो कही भाई को सौंप दिया है उससे वास्तव में ऐसा प्रतीत तो होता ही है मानो, दूध के रखबाली का जिम्मा बिल्ली को सौंप कर जहाँ वास्तव में एक बड़ी ढिठाई की है आम जनों की हित की अनदेखी भी. ऐसे में आमजनों के बीच उसकी (प्रसाशन की ) जग-हसाई भी कम नहीं हो रही है. जिम्मेनामा किस प्रकार और किनको दिया जा सकता है ? कानूनी प्रावधान क्या है ? आमजनों के हित की बात तथा प्रसाशन और जन-बितरण प्रणाली तथा काला बाजारियों के बीच के संभावित नाजुक सम्बन्ध और एक ब्रेक के बाद प्रसाशन द्वारा की जाने बाली आमजनों की अनदेखी की निष्पक्ष ब्याख्या और सही चित्रण जिस तरह की गयी उससे भारतीय संबिधान के चतुर्थ स्तम्भ की गरिमा बढ़ी है .
       वास्तव में आपके इस आर्तिक्ले को पढ़ते समय मैं केवल नितेश जी और दैनिक जागरण के साथ होकर रह गया था. मेरे इर्द-गिर्द की कोई बात या फिर कोई आहट मेरा ध्यान बाँट न सका . ऐसे उच्च भाव को लेकर दैनिक जागरण आगे बढ़ता रहे तो निःसंदेह अन्य को भी इनसे प्रेरणा मिलती रहेगी , साथ ही भारतीय लोकतंत्र को और मजबूत होने से कोई रोक भी नहीं सकता ! मैं नितेश जी को पुनः अपनी और से धन्यवाद देता हूँ और ईश्वर से उनके उज्जवल भविष्य की कामना भी करता हूँ !
 स धन्यवाद !

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