सोमवार, 16 जनवरी 2012

जन भावनाओं का क़द्र करने तथा मानवीय भूल सुधारने के सम्बन्ध में

A-149
15 APR, 2011
माननीय सम्पादक ,प्रभातखबर
                           भागलपुर
विषय :- जन भावनाओं का क़द्र करने तथा मानवीय भूल सुधारने के सम्बन्ध में
महाशय ,
               मैं आपका (प्रभातखबर का) नियमित पाठक हूँ.आपके आलेख ,सम्पादकीय के अलावे आपके द्वारा समय-समय पर समाज सुधार के अन्य नए कार्यक्रम काफी सराहनीय रहे हैं .उदाहरण के तौर पर बिहार को बिशेष राज्य का दर्जा दिलाने के लिए अपने यहाँ एक हस्ताक्षर अभियान चलाना ,ICC वर्ल्ड कप को लेकर एक पाठकों का राय ,स्वाश्थ्य के क्षेत्र में हो रहे उपलब्धियों को रेखांकित करना तथा कोशिकाओं से लेकर मानव के समग्र विकाश तक की कहानियों को पडोसना एवं छात्रों के लिए हितौप्देश जैसी अन्य महत्वपूर्ण बिन्दुओं को  प्रमुख समाचार के अलावे महत्व देना, फिर अभिमत में पाठकों के बिचारों को पडोसना एक बड़ी बात है .इन तमाम गिनाये उपलब्धियों के लिए मई आपको धन्यवाद देता हूँ ......!
              महोदय चूँकि हमारा पहचान पहले कोशी से है फिर अररिया,पुरनिया,मधेपुरा,सुपौल या फिर सहरसा से अलग-अलग है .ऐसे में अररिया और पुर्णिया में छपे न्यूज़ यदि सहरसा में नहीं दिखे और फिर,सहरसा में छपे न्यूज़ यदि अररिया और पुर्णिया में नहीं दिखे तो काफी हैरानी होती है ,यहाँ बसने बाले लोग अपने को एक जगह रहकर भी एक दुसरे से बिलकुल अलग थलग पाते / महशुश करते हैं .
             मेरे बिचार से प्रभातखबर के इस पहल से यहाँ के जन-भावनाओं का क़द्र भी होगा और स्वतः -स्फूर्त भाव से अखबार का डिमांड भी बढ़ जायेगा ..........................................................................
              इसके साथ ही मैं श्रीमान का ध्यान 15APRIL ,2011 के अभिमत में छपे शीर्षक "ऐसे थे बाबा साहब" के तरफ आकृष्ठ करना चाहता हूँ जो बिचार (लेख) तो मेरा (डॉ.रवीन्द्र कुमार सिंह ,भाजपा जिला प्रवक्ता ; सहरसा) है परन्तु आपने उसे सुनील कुमार सिंह ,कंकड़बाग के नाम कर दिया है .
           श्रीमान  साग्रह निवेदन है की उपरोक्त सुझाये गए बिचार तथा छोटी सी मानवीय भूल को सुधारकर हमें उत्साहित करें.कृत कार्रवाई का हमें इन्तजार रहेगा ......  
स धन्यवाद ..!                                                 आपका पाठक
                                                                डॉ.रवीन्द्र कुमार सिंह ,
                                                       भाजपा जिला प्रवक्ता ; सहरसा(BIHAR)
                                                      ईमेल :-  rabindra2166@gmail.com


note:-
    14 -04 -11  को मेरे द्वारा भेजे गए बिचार ये हैं :-
                                                                     
                                                                           प्रकाशनार्थ-प्रेषित
      एक पंखुड़ी बाला “बन-गुलाब” भी बन जाता है बहु पंखुड़ी बाला “गुलाब”
..................बाबा साहब  डॉ. भीम राव आंबेडकर                                         
      14 April 1891 April को Mhow (MP) में जन्मे
भारतीय-संबिधान के निर्माता बाबा साहब  डॉ. भीम राव आंबेडकर जिहोने अकेले के दम पर  संबिधान निर्माण की अपनी सफलता पर मिल रही सबाशी पर बड़े ही सहज तरीके से तथा विनम्रता-पूर्वक संबिधान सभा को स्पष्ट खंडन करते हुए कहा की उन्होंने मात्र अपनी ड्यूटी निभाई है ऐसा कुछ भी असहज नहीं जिसे कोई और दुसरे लोग नहीं कर सकते .कितने महान थे वो जिन्हें अपनी प्रसंशा भी अच्छी नहीं लगती .उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि, उन्हें उनके अकेले इतने अच्छे "भारतीय-संबिधान" के निर्माण कार्य की बाहबाही या प्रसंशा अच्छी नहीं लगती,
     उन्होंने यह साफ कहा की संबिधान की अच्छाई अथवा बुराई की परख अभी नहीं बल्कि इसके अनुपालन पर ही होगा जिनके लिए यह बना है . संबिधान कितना भी अच्छा क्यों न हो यदि इसे लागु करने बाले लोग बुरे होंगे तो यह संबिधान भी बुरा ही साबित होगा जबकि ईमानदार व अच्छे लोग होंगे तो बुरा संबिधान भी अच्छा साबित होगा ....!
      समाज के दलित वा अशिक्षित लोगो का उतशाह वर्धन करते हुए उन्होंने अपने एक महत्वपूर्ण और काफी वैज्ञानिक तर्क देते हुए लोगों को आगे बढ़ने का सन्देश भी दिया और कहा कि,कलम-दर-कलम लगाने से एक पंखुड़ी बाला “बन-गुलाब” भी बन जाता है बहु पंखुड़ी बाला “गुलाब ” . बाबा साहब डॉ. भीम राव आंबेडकर के ये वैज्ञानिक तथा सर्वमान्य सत्य शब्द आज भी उतने ही प्रसांगिक हैं जितने की उन दिनों थी और आशा है हर युग में उतने ही प्रासंगिक रहेंगे !
        अशिक्षित, दलित व महादलित परिवार के लोग आज भी इस चिंता से ऊपर उठकर अपने आने वाले पीढ़ी को अपने से बेहतर करने का तालीम देने की सिर्फ आदत तो डालें  निश्चय ही एक दिन वही संतान बड़ा आदमी होकर सामने आएगा,  वही IAS,IPS बनेगा व वही देस का भावी नेतृत्व भी करेगा स्वतः छुआछुत का भाव भी मिट जायेगा.        ऐसे महान बिभूति भारत के रत्न December 6, 1956 को इस बिराट संसार को त्याग कर अमरत्व को प्राप्त हुए .हम सभी जिला भाजपाई,सहरसा कि ओर से उन्हें शत-शत नमन ....!
डॉ.रवीन्द्र कुमार सिंह
भाजपा जिला प्रवक्ता ,सहरसा (बिहार)
 

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Dr.Ravindra singh 
4/15/11

to bhagalpur, patna, araria2010
A-149
15 APR, 2011
माननीय सम्पादक ,प्रभातखबर
                           भागलपुर
विषय :- जन भावनाओं का क़द्र करने तथा मानवीय भूल सुधारने के सम्बन्ध में
महाशय ,
               मैं आपका (प्रभातखबर का) नियमित पाठक हूँ.आपके आलेख ,सम्पादकीय के अलावे आपके द्वारा समय-समय पर समाज सुधार के अन्य नए कार्यक्रम काफी सराहनीय रहे हैं .उदाहरण के तौर पर बिहार को बिशेष राज्य का दर्जा दिलाने के लिए अपने यहाँ एक हस्ताक्षर अभियान चलाना ,ICC वर्ल्ड कप को लेकर एक पाठकों का राय ,स्वाश्थ्य के क्षेत्र में हो रहे उपलब्धियों को रेखांकित करना तथा कोशिकाओं से लेकर मानव के समग्र विकाश तक की कहानियों को पडोसना एवं छात्रों के लिए हितौप्देश जैसी अन्य महत्वपूर्ण बिन्दुओं को  प्रमुख समाचार के अलावे महत्व देना, फिर अभिमत में पाठकों के बिचारों को पडोसना एक बड़ी बात है .इन तमाम गिनाये उपलब्धियों के लिए मई आपको धन्यवाद देता हूँ ......!
              महोदय चूँकि हमारा पहचान पहले कोशी से है फिर अररिया,पुरनिया,मधेपुरा,सुपौल या फिर सहरसा से अलग-अलग है .ऐसे में अररिया और पुर्णिया में छपे न्यूज़ यदि सहरसा में नहीं दिखे और फिर,सहरसा में छपे न्यूज़ यदि अररिया और पुर्णिया में नहीं दिखे तो काफी हैरानी होती है ,यहाँ बसने बाले लोग अपने को एक जगह रहकर भी एक दुसरे से बिलकुल अलग थलग पाते / महशुश करते हैं .आवश्यकता है इन बिखराव के दर्द को समझने की ,एक नयी कोशिश करने की जिससे चाहे जिला जो भी हो न्यूज़ सबको सभी जगह मिल जाय .
             मेरे बिचार से प्रभातखबर के इस पहल से यहाँ के जन-भावनाओं का क़द्र भी होगा और इससे अखबार का डिमांड भी स्वतः -स्फूर्त भाव से बढ़ जायेगा ..........................................................................

              इसके साथ ही मैं श्रीमान का ध्यान 15APRIL ,2011 के अभिमत में छपे शीर्षक "ऐसे थे बाबा साहब" के तरफ आकृष्ठ करना चाहता हूँ जो बिचार (लेख) तो मेरा (डॉ.रवीन्द्र कुमार सिंह ,भाजपा जिला प्रवक्ता ; सहरसा) है परन्तु आपने उसे सुनील कुमार सिंह ,कंकड़बाग के नाम कर दिया है .
           श्रीमान से  साग्रह निवेदन है की उपरोक्त सुझाये गए बिचार तथा छोटी सी मानवीय भूल को सुधारकर हमें उत्साहित करें.कृत कार्रवाई का हमें इन्तजार रहेगा ......  
स धन्यवाद ..!                                                 आपका पाठक
                                                                डॉ.रवीन्द्र कुमार सिंह ,
                                                       भाजपा जिला प्रवक्ता ; सहरसा(BIHAR)
                                                      ईमेल :-  rabindra2166@gmail.कॉम  
 

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