जब “दीन” के तन पर बसन नहीं ,
देता कोई भी लवण नहीं .
मान और सम्मान के भय से,
देता स्वजन भी बचन नहीं.
मुह्बोले की बात उठाता,लाचारों की बात नहीं;
लाचारों के लाशों को, देता कोई भी कफन नहीं.
लवन,बचन, कफन देने से, जो मुकरते हैं नहीं;
“रवींद्र” वो इस जहान में,”ईश्वर” हैं मानव हैं नहीं . १.बसन -वस्त्र ; २.लवण -नमक ; ३.जहान -दुनिया
देता कोई भी लवण नहीं .
मान और सम्मान के भय से,
देता स्वजन भी बचन नहीं.
मुह्बोले की बात उठाता,लाचारों की बात नहीं;
लाचारों के लाशों को, देता कोई भी कफन नहीं.
लवन,बचन, कफन देने से, जो मुकरते हैं नहीं;
“रवींद्र” वो इस जहान में,”ईश्वर” हैं मानव हैं नहीं . १.बसन -वस्त्र ; २.लवण -नमक ; ३.जहान -दुनिया
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