मंगलवार, 15 मार्च 2011

दिशाहीन भाजपा नहीं

Sunayna-Putra says: दिशाहीन भाजपा नहीं
यह सत्य है की बिना किसी सार्थक बहस या सार्थक परिणाम के पार्लियामेंट का संपूर्ण सत्र समाप्त हो गया. और ऐसा होता भी क्यों नहीं बिपक्ष दूध का दूध और पानी का पानी फैसला सुनना चाहती है और वहीँ सत्तापक्ष मानो इससे कोई इत्तफाक रखती ही नहीं . आखिर इसके लिए जिम्मेवार कौन सत्तापक्ष या बिपक्ष ….? मेरे समझ से बिपक्ष तो हरगिज नहीं .
बी.जे.पी.की पहली आपत्ति है की देस में एक से बढ़कर एक घोटाले पर घोटाला (२जी. स्पेक्ट्रुम घोटाला ,मुम्बई आदेर्स सोसायटी घोटाला ,कॉमन वेल्थ खेल घोटाला , ,बोफोर्स घोटाला जैसे और न जाने कितने ढेरों घोटाले) होते रहे और ऐसे घोटाले पर सरकार चुप्पी साधे बैठी रही , इससे साफ जाहीर होता है की सरकार भी इस घोटाले में सामिल है,
वही दूसरी तरफ सरकार महगाई को रोकने में पूरी तरफ बिफल भी रही है ,इस प्रकार बिपक्ष जो मांग या आपत्ति प्रकट की जा रही है वह जायज और केवल जायज हीं प्रतीत होता है .
जिस घटना या घोटालो में सरकार की संलिप्तता हो, और इस प्रकार की घटनाओं की जाँच स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी से ना हो यह तो घोर आपत्तिजनक और आश्चर्यजनक बात है ही , फिर जब हमारे संबिधान में जे.पी.सी. की भी ब्यवस्था है जो सबसे ज्यादा सर्वग्राह्य व सर्वमान्य भी है उसे स्वीकार करने में एतराज ही क्यों ? देस की जनता अपने जनप्रतिनिधियों के क्रिया कलापों को देख रही है ,उन्हें कुछ कह सुनकर गुमराह नहीं किया जा सकता इस बात को देस की जनता कभी स्वीकार भी नहीं करेगी .
अब जे.पी.सी. की मांग करने बाली केंद्र की प्रमुख बिपक्षी दल भाजपा के इस मांग को यह कहकर ठुकरा देना की बीजेपी का यह मांग न्यायिक कम राजनीतिक ज्यादा लगता है ,मेरे समझ से यह न तो युक्तिसंगत है और न हीं बिधिसम्मत. यह स्वस्थ्य परम्परा को दरकिनार कर जिसकी लाठी उसकी भैंस जैसे कहानी को चरितार्थ करने जैसा ही लगता है . कारगर कदम उठाने की मनसा से हीं इसे सहर्ष स्वीकार कर लेना चाहिए .
बीजेपी द्वारा जे.पी.सी.की मांग रखने और कांग्रेस द्वारा इस मांग को ठुकरा देने की घटना पर सम्पूर्ण भारत की जनता हैरान है . आखिर हैरान भी क्यों नहीं हों ? बिना किसी सार्थक बहस या सार्थक परिणाम के पार्लियामेंट का संपूर्ण सत्र समाप्त हो गया .और बो भी तब ,जबकि देस के सामने काफी महत्वपूर्ण मसले बिचार के लिए आने थे ,जिसमे भ्भ्रष्टाचार ,महंगाई ,बेरोजगारी ,किशानों के हित की बातें ,शिक्षा ,स्वस्थ्य ,रोड इत्यादि के साथ हीं आतंकवाद एवं जम्मू कश्मीर जैसे महत्वपूर्ण मसले सामिल हैं ,पर बहस होना था .तमाम बातों का लिपापोथी करने के लिए एक बहुत ही ईमानदार छबी रखने बाले बड़े ही बिद्वान और संत प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह जी का नाम सामने प्रस्तुत कर दिया जाता है .
वास्तव में प्रधानमन्त्री डॉ.मनमोहन सिंह जी का नाम देस के सामने एक बहुत ही ईमानदार छबी रखने बाले बड़े ही बिद्वान और संत प्रधानमन्त्री के रूप में सुमार है जिसका फायदा कांग्रेस नेत्री और सत्तारूढ़ दल की अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गाँधी को सहज ही मिल भी जाता है .
यह बात दीगर है कीअगर यह घटना नहीं घटती तो सरकार के नियत का पता भी नहीं चलता .इस घटना के कारण न केवल कांग्रेसी सरकार की मानसिकता का पर्दाफास हुआ है बल्कि सरकार ने स्वयं अपनी साख भी बिगाड़ी है ,
इतना ही नहीं बल्कि इस घटना से स्वयं हमारे आदरणीय प्रधानमन्त्री जी की भी छबी धूमिल हो रही है , यधपि की बो स्वयं काफी सिष्ट और ब्याक्तिगत रूप से काफी ईमानदार हैं , उनके प्रति हम सबोंका भी सम्मान है . आज इतने बड़े संत एक महान अर्थसास्त्री एक महान आत्मा भारातबर्स के सीधे साधे प्रधानमन्त्री के रूप में लोगों के बीच सुमार होने लगे हैं .लोग उन्हें बेचारा कहकर पुकारने लगे यह बात हमलोगों को ठीक नहीं लगता ,भले कांग्रेस पार्टी के आलाकमान को अब जैसा लगे .कुलमिलाकर यह कांग्रेस पार्टी के लिए अच्छा संकेत नहीं देता .
क्या कांग्रेस पार्टी को इस बात की तनिक भी चिंता है ? की इतने बड़े नाम ,ऐसे बिद्वान और ब्याक्तिगत रूप से काफी ईमानदार प्रधानमंत्री का नाम बेचारा प्रधानमंत्री के रूप में सुमार हो रहा है, तो आखिर ऐसा क्यों ? सायद किसी भी ब्यक्ति या पार्टी के लिए यह असहज ही प्रतीत होता है ,परन्तु कांग्रेस अध्यक्षा व पार्टी-आलाकमान अभी भी पूर्ण बेखबर.ही दिखती हैं .
मैं ब्याक्तिगत रूप से इतना जरुर कहना चाहूँगा की सोनिया गाँधी भले इस महत्व को समझे या नहीं समझे परन्तु सम्पूर्ण देस की जनता इस महत्व को समझती है .आज सम्पूर्ण देस में इस बात की काफी चर्चा होती है की , आखिर प्रधानमन्त्री और बेचारा …………..? अभी भी समय रहते स्वयं प्रधानमंत्री को अपने इस इमेज और इमानदार छबि को बरकरार रखने के लिए बिना बिलम्ब किये बिपक्ष की मांग (जे.पि.सी ) को मान लेना चाहिए इससे दूध का दूध और पानी का पानी फैसला भी सामने आ जाएगा ,भारतबर्स के प्रधानमंत्री की फजीहत भी रुकेगी और पार्लियामेंट की मार्यादा भी कायम रह पायेगी.
इसे हरगिज न भूले की सदन की गरिमा हम सबों की ब्याक्तिगत या दलगत प्रतिष्ठा मान मार्यादा व गरिमा से सर्वथा ऊपर और श्रेष्ठ है इसकी उपेक्षा हम सबों के लिए जब कभी भी महँगा ही पडेगा . इसके साथ ही आने बाले भावी पीढ़ी को इसका हिसाब भी देना पडेगा . आस्था और बिस्वास के साथ जबाबदेही एक बड़ी पूंजी है, इसे कायम रखने की आवश्यकता है , और यही है इंडियन डेमोक्रेसी की मांग भी ………………………………………………………….
जिला भाजपा सहरसा (बिहार) की तरफ से सम्पूर्ण देसबासीयों को गणतंत्र दिवस के इस पावन अवसर पर हमारी अग्रिम किन्तु हार्दिक सुभकामनाएँ ,ढेर सारी बधाईयाँ !
जय हिंद ! जय भारत !

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