एक पंखुड़ी बाला “बन-गुलाब” भी बन जाता है बहु पंखुड़ी बाला “गुलाब” ..................बाबा साहब डॉ. भीम राव आंबेडकर
14 April 1891 April को Mhow (MP) में जन्मे भारतीय-संबिधान के निर्माता बाबा साहब डॉ. भीम राव आंबेडकर जिहोने अकेले के दम पर संबिधान निर्माण की अपनी सफलता पर मिल रही सबाशी पर बड़े ही सहज तरीके से तथा विनम्रता-पूर्वक संबिधान सभा को स्पष्ट खंडन करते हुए कहा की उन्होंने मात्र अपनी ड्यूटी निभाई है ऐसा कुछ भी असहज नहीं जिसे कोई और दुसरे लोग नहीं कर सकते .कितने महान थे वो जिन्हें अपनी प्रसंशा भी अच्छी नहीं लगती .उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि, उन्हें उनके अकेले इतने अच्छे "भारतीय-संबिधान" के निर्माण कार्य की बाहबाही या प्रसंशा अच्छी नहीं लगती,
उन्होंने यह साफ कहा की संबिधान की अच्छाई अथवा बुराई की परख अभी नहीं बल्कि इसके अनुपालन पर ही होगा जिनके लिए यह बना है . संबिधान कितना भी अच्छा क्यों न हो यदि इसे लागु करने बाले लोग बुरे होंगे तो यह संबिधान भी बुरा ही साबित होगा जबकि ईमानदार व अच्छे लोग होंगे तो बुरा संबिधान भी अच्छा साबित होगा ....!
समाज के दलित वा अशिक्षित लोगो का उतशाह वर्धन करते हुए उन्होंने अपने एक महत्वपूर्ण और काफी वैज्ञानिक तर्क देते हुए लोगों को आगे बढ़ने का सन्देश भी दिया और कहा कि,कलम-दर-कलम लगाने से एक पंखुड़ी बाला “बन-गुलाब” भी बन जाता है बहु पंखुड़ी बाला “गुलाब ” . तो फिर इसी आधार पर एक अशिक्षित व निरा मुर्ख परिवार में भी एक दिन बहु-गुणवान संतान हो सकते हैं .आवश्यकता इस बात की है कि, ऐसे सभी अशिक्षित दलित व महादलित देस में आगे बढ़ने के लिए व "बहु-मुखी गुलाब" कि तरह दिखने के लिए कम से कम अपने भावी पीढ़ी को उच्च स्तरीय शिक्षा ग्रहण करने अथवा कराने के लिए उन्हें प्रेरित करें इसे अपना धर्म समझें .बाबा साहब डॉ. भीम राव आंबेडकर के ये वैज्ञानिक तथा सर्वमान्य सत्य तर्क /शब्द आज भी उतने ही प्रसांगिक हैं जितने की उन दिनों थी और आशा है हर युग में उतने ही प्रासंगिक रहेंगे !
अशिक्षित, दलित व महादलित परिवार के लोग आज भी इस चिंता से ऊपर उठकर अपने आने वाले पीढ़ी को अपने से बेहतर करने का तालीम देने की सिर्फ आदत तो डालें निश्चय ही एक दिन वही संतान बड़ा आदमी होकर सामने आएगा, वही IAS,IPS बनेगा व वही देस का भावी नेतृत्व भी करेगा स्वतः छुआछुत का भाव भी मिट जायेगा. क्या लाजबाब तर्क ...........................और कितने बड़े तार्किक थे वो ......? ऐसे महान बिभूति भारत के रत्न December 6, 1956 को इस बिराट संसार को त्याग कर अमरत्व को प्राप्त हुए .हम सभी जिला भाजपाई,सहरसा कि ओर से उन्हें शत-शत नमन ....!
डॉ.रवीन्द्र कुमार सिंह
भाजपा जिला प्रवक्ता ,सहरसा (बिहार)
14 April 1891 April को Mhow (MP) में जन्मे भारतीय-संबिधान के निर्माता बाबा साहब डॉ. भीम राव आंबेडकर जिहोने अकेले के दम पर संबिधान निर्माण की अपनी सफलता पर मिल रही सबाशी पर बड़े ही सहज तरीके से तथा विनम्रता-पूर्वक संबिधान सभा को स्पष्ट खंडन करते हुए कहा की उन्होंने मात्र अपनी ड्यूटी निभाई है ऐसा कुछ भी असहज नहीं जिसे कोई और दुसरे लोग नहीं कर सकते .कितने महान थे वो जिन्हें अपनी प्रसंशा भी अच्छी नहीं लगती .उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि, उन्हें उनके अकेले इतने अच्छे "भारतीय-संबिधान" के निर्माण कार्य की बाहबाही या प्रसंशा अच्छी नहीं लगती,
उन्होंने यह साफ कहा की संबिधान की अच्छाई अथवा बुराई की परख अभी नहीं बल्कि इसके अनुपालन पर ही होगा जिनके लिए यह बना है . संबिधान कितना भी अच्छा क्यों न हो यदि इसे लागु करने बाले लोग बुरे होंगे तो यह संबिधान भी बुरा ही साबित होगा जबकि ईमानदार व अच्छे लोग होंगे तो बुरा संबिधान भी अच्छा साबित होगा ....!
समाज के दलित वा अशिक्षित लोगो का उतशाह वर्धन करते हुए उन्होंने अपने एक महत्वपूर्ण और काफी वैज्ञानिक तर्क देते हुए लोगों को आगे बढ़ने का सन्देश भी दिया और कहा कि,कलम-दर-कलम लगाने से एक पंखुड़ी बाला “बन-गुलाब” भी बन जाता है बहु पंखुड़ी बाला “गुलाब ” . तो फिर इसी आधार पर एक अशिक्षित व निरा मुर्ख परिवार में भी एक दिन बहु-गुणवान संतान हो सकते हैं .आवश्यकता इस बात की है कि, ऐसे सभी अशिक्षित दलित व महादलित देस में आगे बढ़ने के लिए व "बहु-मुखी गुलाब" कि तरह दिखने के लिए कम से कम अपने भावी पीढ़ी को उच्च स्तरीय शिक्षा ग्रहण करने अथवा कराने के लिए उन्हें प्रेरित करें इसे अपना धर्म समझें .बाबा साहब डॉ. भीम राव आंबेडकर के ये वैज्ञानिक तथा सर्वमान्य सत्य तर्क /शब्द आज भी उतने ही प्रसांगिक हैं जितने की उन दिनों थी और आशा है हर युग में उतने ही प्रासंगिक रहेंगे !
अशिक्षित, दलित व महादलित परिवार के लोग आज भी इस चिंता से ऊपर उठकर अपने आने वाले पीढ़ी को अपने से बेहतर करने का तालीम देने की सिर्फ आदत तो डालें निश्चय ही एक दिन वही संतान बड़ा आदमी होकर सामने आएगा, वही IAS,IPS बनेगा व वही देस का भावी नेतृत्व भी करेगा स्वतः छुआछुत का भाव भी मिट जायेगा. क्या लाजबाब तर्क ...........................और कितने बड़े तार्किक थे वो ......? ऐसे महान बिभूति भारत के रत्न December 6, 1956 को इस बिराट संसार को त्याग कर अमरत्व को प्राप्त हुए .हम सभी जिला भाजपाई,सहरसा कि ओर से उन्हें शत-शत नमन ....!
डॉ.रवीन्द्र कुमार सिंह
भाजपा जिला प्रवक्ता ,सहरसा (बिहार)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें