वैसे तो २००९ से हीं भाजपा ने इस भ्रष्ट युपीए-सरकार की कुछ गिनी-चुनी उपलब्धियों (बोफोर्ष घोटाला,राष्ट्र मंडल खेल घोटाला, मुम्बई आदर्श शोसायटी घोटाला ,२ (टू.जी) स्पेक्ट्रम घोटाला ४००० करोड़ का कोड़ा /झारखण्ड, घोटाला ) के लिए उसके कु-कृत्य कि निंदा करती हीं है, उसके खिलाप आन्दोलन भी जारी रक्खी है.
किन्तु आज जबकि देस के नागरिक, युवा व नौजवान साथी तथा देस के बीर-जवान सेनानी ६५वी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिल्ली के लाल किला के प्राचीर से निकली देस के ईमानदार प्रधानमन्त्री डॉ.मनमोहन सिंह के उस अहम् संदेश की समीक्षा में जुटे हीं थे की, तडके १६-०८-११ की अहले शुबह लगभग ७-४५ बजे केंद्र की भ्रष्ट यूपीए सरकार ने लोकतान्त्रिक तरीके से अपनी बात रखने बालों (सिविल सोसाइटी की शर्तों को मानते हुए लोकपाल बिल लाने की मांग पर अड़े व अनशन पर चल रहे अन्ना हजारे व उनके समर्थकों ) की जिस नाटकीय अंदाज /अलोकतांत्रिक तरीके से गिरफ्तारी ली उसकी कितनी भी निंदा की जाय तो वो कम ही है.
वास्तव में जब-जब लोकतंत्र की हत्यारी इस सरकार के काले करतूतों के उजागर करने बाले आगे बढ़ते हैं ,ये इसी तरह अपने काले करतूतों से बचने के लिए इसी तरह लोकतंत्र पर हमला बोलते रहते हैं. हमें अगर 1974-1975 JUNE कि घटना याद है तो फिर, ४-५ जून २०११ को रामदेव जी के साथ (RAMLILA GROUND DELHI) की घटना ,०९-०८-११ की भाजुमो के साथ की गयी घटना और आज गांधीवादी अन्ना हजारे के साथ की घटना भी याद रहेगी जो वास्तव में 1974-1975 JUNE की घटना से बहुत कुछ मिलता-जुलता है .
जिला प्रवक्ता डॉ. रविन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि, जिसप्रकार भ्रष्टाचार के मुद्दे पर पूरे देश की छटपटहाट व एकजुटता सामने आयी है उसे देख केंद्र में बैठे लोगों के बीच बौखलाहट हो गयी है . अन्ना के पक्ष में व्यापक जनसमर्थन देख केंद्र की सरकार ने घबड़ाहट में उन्हें गिरफ्तार कर अपने हिटलर साही प्रवृत्ति को जाहिर किया है जो अघोषित-इमरजेंसी जैसा हीं प्रतीत होता है. अब इसे लोगों ने मान लिया है कि, कांग्रेस ने अपनी अघोषित किन्तु इस बर्ष की दूसरी तथा अपने स्वयं के कोंग्रेसी-हुकूमत की तीसरी इमरजेंसी लागू कर दी है ..
आज अन्ना का चेहरा गांधी का चेहरा एवं अन्ना का आवाज देस के करोडो लोगों की दिलों की आवाज प्रतीत होती है.ऐसे में इस काले करतूतों की सरकार भला उन्हें बाहर रहने देती कैसे ? देस के एक-आध प्रांत की बात छोड़कर अन्य सभी प्रान्तों के मुख्यमंत्री ने जिस लोकपाल को लागू करने की जरुरत पर बल दे रहे हैं, उसी लोकपाल के समर्थक गांधीवादी बिचारक अन्ना हजारे को आज नजरबन्द कर उन्हें ही नहीं बल्कि देस की सबा अरब जनता को मानो अनसन या धरना नहीं करने की नशिहत दे डाली. बाह रे सोनिया और ईमानदार मनमोहन जी जनतांत्रिक सरकार ? ईमानदारी पूर्वक लोकतंत्र की ह्त्या करना कोई आपसे सीखे .
जिला प्रवक्ता डॉ. रवीन्द्र कुमार सिंह ने आगे कहा कि, अब जहाँ अन्ना हजारे की गिरफ्तारी इमरजेंसी का पूर्वाभास है ,वहीँ देस के भावी खेवनहार होनहार युवा नौजवानों के धैर्य व कौशल का इम्तिहान भी है . हमारे बिचार में अब वह समय आ गया है कि, जब हमें मन ,कर्म व बचन से यह सिद्ध कर देना है कि, भारतीय जनता पार्टी का एक-एक कार्यकता जहाँ कोंग्रेस के किसी भी चुनौती का सामना करने तथा देस की संप्रभुता को अक्षुण रखने में समर्थ है वहीँ, लोकतांत्रिक मार्यादा की हिफाजत करने को पूरी तरह तैयार वो प्रतिबद्ध भी है.
धरना को संबोधित करते हुए प्रवक्ता डॉ.रवीन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि , भाजपा जिला इकाई सहरसा के ओर से हम, भारत के महामहिम राष्ट्रपति महोदया श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल से/माननीय सर्वोच्च न्यायालय से केंद्र सरकार के इस दमनकारी निति के खिलाप तत्काल हस्तक्षेप करते हुए बर्तमान सरकार को अबिलम्ब बर्खास्त कर/संज्ञान लेकर देस में लोकतांत्रिक सरकार बहाल करने की अपील करते हैं. इधर ऐसा नहीं होने पर अराजकता की स्थिति को ध्यान में रखते, देस के लाखों दिलों की आवाज गांधी वादी अन्ना हजारे की अविलम्ब बिना शर्त वापसी की मांग करते हुए, हम पुनः संकल्प दुहराते हैं कि, अब जबतक इस लोकतंत्र के हत्यारी सरकार को हम हटा नहीं देते लोकतंत्र के हितार्थ हमारा अनवरत आन्दोलन जारी रहेगा.
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