रविवार, 21 अगस्त 2011

श्री कृष्ण जन्माष्टमी dated 21-08-11

        गोबर्धन पर्वत को अपने ऊँगली से टेककर गौ माता एवं गौकुल के तमाम नर व नारियों की रक्षा करने बाले नारायण , देवकी नंदन और मैया यशोदा का लाडला एक तरफ जहां गौकुल वाशियों का माखन चोर है तो दूसरी तरफ ब्रज वाशियों व राधा के सहेलियों का दिल/वश्त्र चोर भी है . अपने बांशुरी के धूण से गौकुल वाशी तथा ब्रज वाशियों का दिल बहलाता ये कान्हां बाल्य-काल में हीं कंश द्वारा विषपान कराने के उद्धेश्य से भेजे गए ताडका का न केवल विषपान किया बल्कि उसे उसकी मुक्ति धाम भी पहुचा दिया .
        श्री कृष्ण के ह्रदय में जितना प्रेम, नैसर्गिक प्रेम , श्रद्धा ,अनुराग, भक्तों के प्रति अगाध प्रेम व सहयोग का भाव है/था उतना हीं क्षमा , दया, करुना, और त्याग तथा कठोर निर्णय लेने के साथ हीं दंड देने की भी. कंश बद्ध , देवकी-वाशुदेव तथा अपने नाना को बंदी गृह से मुक्त कराकर उन्होंने पुत्र होने का पहला धर्म व कर्तब्यों का बखूबी निर्वहन किया तो वहीँ पांडव का सहयोग कर जरासंध बद्ध से जेल में बंद ब्रह्मण देवताओं/राजाओं को मुक्त कराकर ब्रह्मण देवता के प्रति अपना स्पष्ट श्रद्धा-भाव / फर्ज व कर्तब्यों को भी स्पस्ट किया.
         भाव के रक्षक एवं भाव का भूखा राधा के श्री कृष्ण , मीरा बाई के पति हैं तो सुपत , भीलनी, और विदुर के नाथ भी हैं. बलराम के भाई मथुरा के राजा श्री कृष्ण हैं तो सुदामा के अनन्य मित्र भी हैं ये कन्हैया . वस्त्र चोर से महिमा मंडित ये माधव श्री कृष्ण मुरारी ने जब हाश्तिनापुर की कुल-बधू और पांडवों की धर्म-पत्नी द्रोपदी को कौरवों द्वारा नंगा किये जाने के समय जब वश्त्र  बढाने लगे तो फिर संसार कह उठा कि, ये वश्त्र चोर नहीं ये मुरली मनोहर माधव वास्तव में माधव हैं, हम बड़े शौभाग्य शाली हैं कि, परम वैभवशाली ज्ञानियों में महा ज्ञानी अर्जुन के तरकश से निकले अनंत प्रश्नों का समाधान व संसार के समस्त प्राणियों के श्री विग्रह नारायण भगवान् श्री कृष्ण का आज जन्म-दिन मनाया जा रहा है. और हम सब यहाँ  उदघाटन करने पहुंचे हैं . हम ऋणी हैं बनगांव ग्राम वाशियों के ,हम ऋणी हैं बनगांव श्री कृष्ण जन्माष्टमी मेला समारोह के आयोजकों के जिन्होंने हमें ऐसे ऐतिहाशिक किन्तु धार्मिक अनुष्ठानों में सरिक होने / उदघाटन करने का अवशर प्रदान किया है. श्रीकृष्ण भगवान् की प्रतिष्ठा गौ माता की सेवा से संभव है. अतः हम चाहेंगे की अपने यहाँ या फिर गौशाला में गौ माता की सेवा जिससे संभव हो हाथ बटाए . गाय खरीद कर देना पड़े तो दें .श्री कृष्ण के साथ हीं बाबा लक्ष्मीनाथ गोशायीं को मेरा शत-शत नमन !

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