शर्मनाक टिप्पणी से मुद्दा का भटकाव

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शर्मनाक टिप्पणी से मुद्दा का भटकाव
इन दिनों दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र "भारत वर्ष" के नेताओं ,मंत्रियों द्वारा एक दुसरे पर इतने अशोभनीय टिपण्णी की जा रही है जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती.देस का भविष्य तय करने बाले इस तरह की अशोभनीय टिपण्णी करेंगे ऐसी उम्मीद तो कम से कम बापू को या फिर बाबा साहब भीम राव आंबेडकर को तो नहीं ही होगी .ये काफी शर्मनाक और घोर आपत्तिजनक टिप्पणी तो है ही साथ ही लोकतंत्र के लिए खुला मजाक भी है . नेता को गंभीर होना चाहिए और राष्ट्र के प्रति पूर्ण समर्पित . उचे पद पर आशिना लोगो को केवल अपने बारे में नहीं बल्कि लोकतंत्र की मार्यादाओं के बारे में पहले सोचना चाहिए . और फिर लोकतंत्र की मार्यादाओं को ध्यान में रखकर बातें बोलनी चाहिये.
मुद्दा:- लोकपाल विधेयक ;भ्रष्टाचार का और महंगाई का ,बेकारी व बेरोजगारी का ,महगाई और कालाबाजारी का ,आतंकबाद से निबटने का और अमन-चैन बहाल करने का है ना कि. भटकाव का और ना ही आरोप-प्रत्यारोप और अमार्यादित व असंसदीय भाषाओं का बोछार कर भारतीय लोकतंत्र को शर्मसार करने का .समय के हिसाब से जरुरत है सब मिलजुलकर भारतीय-लोकतंत्र को और मजबूत बनाने की चेष्टा करे; न कि बाक-युद्ध में पड़कर अपने अहम् मुद्दे को ही भुला दे .
इसे हरगिज न भूले की "भारतीय-लोकतंत्र" की गरिमा हम सबों की ब्याक्तिगत या दलगत गरिमा , मान , मार्यादा व प्रतिष्ठा से सर्वथा ऊपर और श्रेष्ठ है .इसकी उपेक्षा हम सबों के लिए जब कभी भी महँगा ही पडेगा . इसके साथ ही आने बाले भावी पीढ़ी को इसका हिसाब भी देना पडेगा . आस्था और बिस्वास के साथ ही जबाबदेही जहाँ एक बड़ी पूंजी है वहीँ आत्म-अनुशाशन इसका बैलेंस-शीट. इसे कायम रखने की आवश्यकता है , और यही है इंडियन डेमोक्रेसी की मांग भी .
thanking you !
डॉ.रवीन्द्र कुमार सिंह
भाजपा जिला प्रवक्ता ,सहरसा (बिहार)
rabindra2166@gmail.com
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