LETTER NO A-203
प्रकाशनार्थ-प्रेषित DATE 01-09-11
"न लगे कभी भी गोंगिया की नजरें न थमे कभी, इन प्रेमचन्द की कलम"
भागलपुर, गुरुवार दिनाक ०१,सितम्बर ११ के मुख्य पृष्ठ पर पहले कालम में छपे शीर्षक "मोहब्बत की चांदनी से सराबोर तीन रातें" में माननीय नितेस जी ने जो शब्दों का संयोजन किया है और जिस तरह कौमी एकता ,श्रधा ,सम्मान,प्यार ,मुहब्बत एवं अपनों के लिए सलामती ,दुआ तथा सुहागन व श्रींगार के प्रतिमूर्ति पति के ह्रदय के भाव को रखा है अथवा चित्रण किया है , बड़ा ही ह्रदय स्पर्शी व मर्म स्पर्शी है . ईद ,तीज और चौथ-चाँद की इस तरह ब्याख्या कि, "जबतक दोनों का चाँद एक रहा , न मेरे चाँद को रेफ आएगा और न तेरे चाँद को खरोच" ने , एक बारगी हमें प्रेमचंद कि याद दिला ही दी .
आज नहीं चाहते भी जहां एक और लोग दलदल में फँस जाते हैं वहीँ हमारे बीच आप जैसे महा मानव भी हैं इन दलदलों से निकालने के लिए. आपने अपने लेखनी के माध्यम से जात और जमात से ऊपर उठकर केवल प्रेम ,सदभाव, भाईचारा समाज को एक सूत्र में जोड़ने का भाव प्रकट कर देस व दुनिया को मार्ग दर्शन किया है .
हम आपके इस बिचार के लिए आपके कायल और मुरीद हो गए हैं . आपने सबों के सलामती की बात की है मैं आपके सलामती और आपके अहिर्निश लेखन प्रक्रिया की सलामती की दुवा करता हूँ ! इस दुनिया के मालिक से यह कहते कि , "न लगे कभी भी गोंगिया की नजरें न थमे कभी, इन प्रेमचन्द की कलम" , हम आपको अपनी शुभकामा देते हैं. जय हिंद ! जय भारतीय लोकतंत्र ! और जय हो लोकतांत्रिक भाव का !
भाजप प्रवक्ता "रवींद्र"
"न लगे कभी भी गोंगिया की नजरें न थमे कभी, इन प्रेमचन्द की कलम"
भागलपुर, गुरुवार दिनाक ०१,सितम्बर ११ के मुख्य पृष्ठ पर पहले कालम में छपे शीर्षक "मोहब्बत की चांदनी से सराबोर तीन रातें" में माननीय नितेस जी ने जो शब्दों का संयोजन किया है और जिस तरह कौमी एकता ,श्रधा ,सम्मान,प्यार ,मुहब्बत एवं अपनों के लिए सलामती ,दुआ तथा सुहागन व श्रींगार के प्रतिमूर्ति पति के ह्रदय के भाव को रखा है अथवा चित्रण किया है , बड़ा ही ह्रदय स्पर्शी व मर्म स्पर्शी है . ईद ,तीज और चौथ-चाँद की इस तरह ब्याख्या कि, "जबतक दोनों का चाँद एक रहा , न मेरे चाँद को रेफ आएगा और न तेरे चाँद को खरोच" ने , एक बारगी हमें प्रेमचंद कि याद दिला ही दी .
आज नहीं चाहते भी जहां एक और लोग दलदल में फँस जाते हैं वहीँ हमारे बीच आप जैसे महा मानव भी हैं इन दलदलों से निकालने के लिए. आपने अपने लेखनी के माध्यम से जात और जमात से ऊपर उठकर केवल प्रेम ,सदभाव, भाईचारा समाज को एक सूत्र में जोड़ने का भाव प्रकट कर देस व दुनिया को मार्ग दर्शन किया है .
हम आपके इस बिचार के लिए आपके कायल और मुरीद हो गए हैं . आपने सबों के सलामती की बात की है मैं आपके सलामती और आपके अहिर्निश लेखन प्रक्रिया की सलामती की दुवा करता हूँ ! इस दुनिया के मालिक से यह कहते कि , "न लगे कभी भी गोंगिया की नजरें न थमे कभी, इन प्रेमचन्द की कलम" , हम आपको अपनी शुभकामा देते हैं. जय हिंद ! जय भारतीय लोकतंत्र ! और जय हो लोकतांत्रिक भाव का !
भाजप प्रवक्ता "रवींद्र"
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