LETEER NO – A - 297
D ATED
21-05-12
सेवा में ,
माननीय
प्रधानमंत्री महोदय
द्वारा - जिलाधिकारी
SAHARSA
महाशय,
राज्य के रूप में बिहार के आने
के १०० साल पुरे हो चुके हैं . बिहार ने
अनेकों बार देस की आज़ादी के लिए देस के बिकास के लिए संख नाद किया है देस के
आन्दोलन में अग्रणी किन्तु महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. बिहार ने अनेकों बार देस
की तक़दीर और तश्वीर को बदलने का न केवल शंखनाद किया बल्कि इसे बदलने का भी काम
किया है. . बिहार में सन २००० में बिहार का अपना ही तश्वीर , तक़दीर और भूगोल इस कदर बदला मानो सारा खान बन संपदा लेकर
झारखंड सम्पान राज्य हो गया वहीँ बिहार के पास बचा तो केवल एक चरमराया आर्थिक
ढांचा. पूर्व वर्ती कोंग्रेस और राजद की सरकार के कुप्रबंधन एवं भर्ष्टाचार ने
मानव विकास सूचकांक ,शाक्षर्ता एवं निर्धनता की दृष्टि से
बिहार को देस के सबसे निचले पायदान पर लाकर खड़ा कर दिया . हालांकि पिछले १० बर्षों
में बिहार में भाजपा और जड़ यूं की सरकार ने बिहार की बदसूरत तश्वीर की जगह एक
अच्छी तश्वीर पेस की , बिहार विकास के तरफ अग्रषर हुवा है
एक अच्छा संकेत मिला है. बिहार और भी आगे बढ़ सकता है यह एक बिकषित प्रदेस बन सकता
है इसके लिए इसे केवल और केवल बिशेष राज्य के दर्जे की दरकार ही . और हमें पूरा
बिस्वास है की बिहार इसे बहुत जल्द पूरा कर देस को एक बिकषित प्रदेस पेस कर देगा.
बिहार को बिसेष राज्य का दर्जा मिले इसके कई कारक बिद्ध्मान हैं. देस में सबसे
अधिक घनी आबादी बाला प्रान्त बिहार है . पुरे देस में ३८२ ब्यक्ति/ प्रति बर्ग
किलोमीटर घनत्व देखा जाता है है जबकि बिहार में ११०२ ब्यक्ति/ प्रति बर्ग
किलोमीटर घनत्व मौजूद है. चूँकि इन सिमित
संसाधनों पर बिहार के बिकास का बहुत बड़ा बोझ
है जो अन्य राज्यों की तुलना में बहुत हिन् चिंताजनक शंकेत प्रदान करता
है. प्रति ब्यक्ति आय के दृष्टिकोण से भी
यदि देखा जय तो यहाँ १६५९२ है जो राष्ट्रीय औसत आय के स्तर से बहुत पीछे है. गरीबी
रेखा से निचे गुजर बसर करने बाले ब्यक्ति को जो केन्द्रीय सहायता राशि दी जाती है
वो भी ६७९.२६ रूपये है जो बहुत ही कम है. यहाँ गरीबी रेखा से निचे रहने बालों की
आबादी भी ५४% है जो पुरे देस में सर्वाधिक है. बिहार के पिछड़े राज्य होने के
प्राकृतिक कारण भी बिद्ध्मान / मौजूद हैं. अंतर्राष्ट्रीय सीमा तीब्र बाढ़ प्रबंधन
क्षेत्र होने के कारण बिशिष्ट भोगोलिक क्षेत्र में आता है. हिमालय की ढालवा क्षेत्र होने के कारण प्रति
बर्ष बढ़ से काफी अपूर्णीय छति होता है. विकास पर प्रतिकूल असर पड़ता है. उत्तर
बिहार में बाढ के कारण जहाँ किसानो की
फसलें नष्ट हो जाती है साथ ही कई माह तक भोगोलिक रूप से संपर्क भंग हो जाता है वहीँ दक्षिणी बिहार
में सुखाड़ के कारण आम लोगों का जीवन दूभर हो जाता है फशल के सुख जाने से किसानो
की माली हालत खास्ता हो जाती है. यहाँ इस इस प्रकार राज्य भोगोलिक isolation , दुर्गम भू क्षेत्र , कमजोर सहायता आधार , कमजोर आधारभूत संरचना , अधिक जनसंख्या घनत्व होने के कारण बिसेष
संरक्षण की आवश्यकता है. इस प्रकार उपरोक्त सभी कारक को देखें तो ऐसा लगता है जैसे
बिहार बिशेस राज्य का दर्जा पाने का पूरा पूरा हकदार है यह बिशेस राज्य का दर्जा
पाने के सभी मानदंडों को पूरा करता है. बाबजूद इसके यदि केन्द्रीय सरकार को ऐसा
लगता है कि, संबैधानिक अडचने अभी
भी आ सकती हैं , तो हम आग्रह करते हैं माननीय प्रधान मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह
जी से कि, जिस राज्य के विकास के बिना
देस के विकास कल्पना भी नहीं कि जा सकती ऐसे राज्य के चतुर्दिक विकास के
लिए यदि संबिधान में किसी प्रकार के संसोधन की ही जरुरत हो जाय तो केंद्र को
(सरकार के मंत्री मंडलीय समिती को ) बिना समय गवाए इसे कर लेना चाहिए, और बिहार
को बिशेस राज्य का दर्जा दे देना चाहिए . इसे न भूलें कि, विकसित बिहार के बिना विकसित भारतवर्ष की कल्पना भी नहीं की
जा सकती . और फिर ठीक इसके बिपरीत बिहार की उपेक्षा जब कभी भी केंद्र के लिए महँगा
ही साबित होगा . केंद्र सरकार की मंत्री मंडलीय समिती एवं योजना आयोग के सचिव , केन्द्रीय
वित्त सचिव (व्यय ) ने पिछले माह बिहार के बिशेष श्रेणी के प्रस्ताव को निरस्त कर
दिया तथा कहा की बिहार निर्धारित मानदंडों को पूरा नहीं करता है. प्रथम दृष्टया यह
दुर्भाग्य पूर्ण तथा दुर्भावनाओं से ग्रषित समझ आता है. अस्तु सुनियोजित तथा
पूर्वाग्रह से प्रेरित होकर तैयार किये गए केन्द्रीय समिती के इस रिपोर्ट का भाजपा
बिरोध करती है और बिहार को बिशेस राज्य दर्जा दिलाने के लिए सड़क से संसद तक संघर्ष
/आन्दोलन जारी रखने का अपनी संकल्प दुहराती है.
भाजपा मानती है कि, राजनैतिक कारणों
से बिहार को बिशेस राज्य का दर्जा नहीं मिल रहा है जो बिहार कि जनता के भावनाओं के
साथ खुला मजाक है. इसे बिहार कि १० करोड़
३८ लाख जनता कभी बर्दास्त नहीं करेगी . भाजपा इन १० करोड़ ३८ लाख जनता के साथ उनके
वाजिब हक़ के लिय सडक से संसद तक आन्दोलन करेगी . इसी क्रम को आगे बढाने आज २१ मई
२०१२ को पार्टी सभी प्रखंड जिला -मुख्यालयों पर महाधरना का आयोजन किया है . अतः
आपसे पुनः सागाह निवेदन है कि, बिहार के साथ ही रास्त्र हित में बिहार को बिशेष राज्य का
दर्जा देकर बिहार के १० करोड़ ३८ लाख जनता के जनभावनाओं का सम्मान करें ! धन्यवाद ! भवदीय पार्टी प्रवक्ता "रवींद्र"
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