सेवा में
माननीय प्रधान सचिव महोदय
मानव संसाधन विकास विभाग (बिहार सरकार) पटना
विषय :- विकलांग एवं अशाध्य रोग से पीड़ित पति के सेवार्थ व नौनिहाल बच्चों के समुचित देखभाल हेतु नियमों को शिथिल करते हुए स्थानान्तरण एवं पदस्थापन के सम्बन्ध में
महाशय,
निवेदन पूर्वक कहना है कि, मै राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय घिवाहा , पंचायत- परवाहा , प्रखंड - फारबिसगंज , जिला अररिया (बिहार) में नियोजित प्रखंड शिक्षिका के रूप में वर्ष २००५ से ही अधतन पदस्थापित होकर कार्यरत हूँ .
महोदय इसमें संदेह नहीं कि, ये न्युक्ति मुझे उस समय मिली जब मेरे पति को AIIMS New Delhi में कैंसर रोग साबित हुए दायें पैर को घुटने से ऊपर तक कटवा देना पड़ा . इस प्रकार उनका जीवन तो बच गया परन्तु वो विकलांग हो गए . मेरी दो पुत्री एक पुत्र कुमार विवेकानंद जो सबसे छोटा है वर्ग सात में पढता है , अपने विकलांग पिता के साथ सहरसा जिला मुख्यालय में ही रहता है. सर्जरी के बाद कीमोथेरेपी एवं रेडिएसन से उत्पन्न कमजोरी के बाबजूद अपनी सेवा की चिंता किये बगैर उन्होंने जो मुझे मेरी नैतिक जिम्मेवारी निभाने के लिए प्रेरित किया है शब्द में मै उनके धैर्य व साहस की ब्याख्या नहीं कर सकती . मेरे सामने जहां नियमित विद्यालय जाने की नैतिक जिम्मेवारी है वहीँ दूसरी ओर हिन्दू धर्म के मुताबिक़ पति ब्रत धर्म भी कम महत्वपूर्ण नहीं और एक माँ होने के नाते वात्सल्य प्रेम भी उतना हीं महत्वपूर्ण है. महोदय मैं अबतक नियमित डयूटी तो करती आ रही हूँ किन्तु न तो अपने पति के सेवा का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है न ही अपने बच्चों का देख-रेख ही कर पा रही हूँ . कभी पति की परेशानियों को सुनकर काफी ब्यथित हो जाती हूँ तो कभी अपने बच्चों की पीड़ा सुनकर फफक उठती हूँ सूना है राजा/ शासक पिता के सामान होते हैं. आप हमारे ऐसे शासक के शिक्षा-विभाग प्रमुख हैं जिन्होंने बिहार वासियों के हितार्थ अनेकों नए नियम बनाकर एक आदर्श शासक होने का उदाहरण प्रस्तुत किया है. अपने बनाए गए शिक्षक नियमावली में शिथिलीकरण / संशोधन भी आप ही कर सकते हैं.
अतः श्रीमान/महोदय से पुनः साग्रह निवेदन है कि, उपरोक्त वर्णित तथ्यों पर सहानुभूति पूर्वक बिचार करते हुए मानवीय मूल्यों के रक्षार्थ शिक्षक नियमावली में शिथिलीकरण / संशोधन करते हुए मेरा स्थानान्तरण एवं पदस्थापन सहरसा जिला मुख्यालय के किसी विद्यालय में करवाने का आदेश निर्गत करने क़ी महती कृपा की जाय . ऐसा करने से जहां महोदय का मेरे ऊपर बड़ी कृपा होगी वहीँ विकलांगता एक्ट १९६६ का सम्मान भी होगा .
विस्वास्भाजन
संलग्नक :-
1. दिनांक १२-०९-१२ को इस सन्दर्भ में श्रीमान के समक्ष (भारती कुमारी)
प्रस्तुत की गयी आवेदन की छाया प्रति संलग्न प्रखंड शिक्षिका, राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय घिवहा
2 AIIMS का कागजात पंचायत परवाहां , प्रखंड- फारबिसगंज , जिला -अररिया
३.विकलांग पति का फोटोग्राफ्स
माननीय प्रधान सचिव महोदय
मानव संसाधन विकास विभाग (बिहार सरकार) पटना
विषय :- विकलांग एवं अशाध्य रोग से पीड़ित पति के सेवार्थ व नौनिहाल बच्चों के समुचित देखभाल हेतु नियमों को शिथिल करते हुए स्थानान्तरण एवं पदस्थापन के सम्बन्ध में
महाशय,
निवेदन पूर्वक कहना है कि, मै राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय घिवाहा , पंचायत- परवाहा , प्रखंड - फारबिसगंज , जिला अररिया (बिहार) में नियोजित प्रखंड शिक्षिका के रूप में वर्ष २००५ से ही अधतन पदस्थापित होकर कार्यरत हूँ .
महोदय इसमें संदेह नहीं कि, ये न्युक्ति मुझे उस समय मिली जब मेरे पति को AIIMS New Delhi में कैंसर रोग साबित हुए दायें पैर को घुटने से ऊपर तक कटवा देना पड़ा . इस प्रकार उनका जीवन तो बच गया परन्तु वो विकलांग हो गए . मेरी दो पुत्री एक पुत्र कुमार विवेकानंद जो सबसे छोटा है वर्ग सात में पढता है , अपने विकलांग पिता के साथ सहरसा जिला मुख्यालय में ही रहता है. सर्जरी के बाद कीमोथेरेपी एवं रेडिएसन से उत्पन्न कमजोरी के बाबजूद अपनी सेवा की चिंता किये बगैर उन्होंने जो मुझे मेरी नैतिक जिम्मेवारी निभाने के लिए प्रेरित किया है शब्द में मै उनके धैर्य व साहस की ब्याख्या नहीं कर सकती . मेरे सामने जहां नियमित विद्यालय जाने की नैतिक जिम्मेवारी है वहीँ दूसरी ओर हिन्दू धर्म के मुताबिक़ पति ब्रत धर्म भी कम महत्वपूर्ण नहीं और एक माँ होने के नाते वात्सल्य प्रेम भी उतना हीं महत्वपूर्ण है. महोदय मैं अबतक नियमित डयूटी तो करती आ रही हूँ किन्तु न तो अपने पति के सेवा का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है न ही अपने बच्चों का देख-रेख ही कर पा रही हूँ . कभी पति की परेशानियों को सुनकर काफी ब्यथित हो जाती हूँ तो कभी अपने बच्चों की पीड़ा सुनकर फफक उठती हूँ सूना है राजा/ शासक पिता के सामान होते हैं. आप हमारे ऐसे शासक के शिक्षा-विभाग प्रमुख हैं जिन्होंने बिहार वासियों के हितार्थ अनेकों नए नियम बनाकर एक आदर्श शासक होने का उदाहरण प्रस्तुत किया है. अपने बनाए गए शिक्षक नियमावली में शिथिलीकरण / संशोधन भी आप ही कर सकते हैं.
अतः श्रीमान/महोदय से पुनः साग्रह निवेदन है कि, उपरोक्त वर्णित तथ्यों पर सहानुभूति पूर्वक बिचार करते हुए मानवीय मूल्यों के रक्षार्थ शिक्षक नियमावली में शिथिलीकरण / संशोधन करते हुए मेरा स्थानान्तरण एवं पदस्थापन सहरसा जिला मुख्यालय के किसी विद्यालय में करवाने का आदेश निर्गत करने क़ी महती कृपा की जाय . ऐसा करने से जहां महोदय का मेरे ऊपर बड़ी कृपा होगी वहीँ विकलांगता एक्ट १९६६ का सम्मान भी होगा .
विस्वास्भाजन
संलग्नक :-
1. दिनांक १२-०९-१२ को इस सन्दर्भ में श्रीमान के समक्ष (भारती कुमारी)
प्रस्तुत की गयी आवेदन की छाया प्रति संलग्न प्रखंड शिक्षिका, राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय घिवहा
2 AIIMS का कागजात पंचायत परवाहां , प्रखंड- फारबिसगंज , जिला -अररिया
३.विकलांग पति का फोटोग्राफ्स
प्रतिलिपि - माननीय मुख्यमंत्री महोदय बिहार सरकार , पटना के सेवा में
सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु समर्पित / अध्यक्ष महिला आयोग
(बिहार राज्य ) , पटना के सेवा में
सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु समर्पित
(भारती कुमारी)
प्रखंड शिक्षिका, राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय घिवहा
प्रखंड शिक्षिका, राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय घिवहा
पंचायत परवाहां , प्रखंड- फारबिसगंज , जिला -अररिया
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