Letter no A-161
dated 25-06-11
पेट्रोलियम मंत्री एस. जयपाल रेड्डी द्वारा शुक्रवार की रात डीजल की कीमत में तीन रूपये प्रति लीटर, कैरोसीन में दो रूपये प्रति लीटर और रसोई गैस की कीमत में 50 रूपये प्रति सिलिंडर की वृद्धि जहाँ घोर जन बिरोधी कदम है,वहीँ इसके साथ ही खाशकर मधयम-वर्गीय लोगो एवं दैनिक मजदूरी कर एक जून की रोटी का जुगाड़ कर जीवन यापन कर रहे गरीब मजदूरों, रिक्शा चालकों ,बुनकर व कुलियों के साथ क्रूर मजाक भी है .
सरकारी कोषों के घाटे को भरने के नाम पर केंद्र की इस लुटेरी U.P.A. सरकार ने इससे पहले तो सबोंके थाली से शब्जी घटाने का काम किया था और अब पुनः इसबार इस बेतहाशा मूल्य बृद्धि कर एक बख्त का भोजन ही गायब कर दिया है .
भ्रष्टाचार की आकंठ में डूबी कालाबाजारियो और पुजीपतियों के बैशाखी पर चलने बाली ये गूंगी व बहरी सरकार देस की जनता का न केवल खूब शोषण किया है बल्कि इनका शोषण कर विदेशी बैंकों में आकूत धन भी जमा किया है .काले धन का पासबुक जमाकर चाहे ये अपने को जितना बड़ा हीं क्यों न समझ ले . देस की जनता इसे बख्सेगी नहीं .अब वो जग चुकी है और इसके काले कारनामे को जान चुकी है .चाहे ये जैसी भी राशलिला क्यों न रच ले देस की जनता इसबार इसे माफ नहीं करेगी .
झूठ के बुनियाद पर टिकी केंद्र की इस लुटेरी U.P.A. सरकार के द्वारा कैरोसीन में दो रूपये प्रति लीटर और रसोई गैस की कीमत में 50 रूपये प्रति सिलिंडर के साथ हीं, डीजल की कीमत में तीन रूपये प्रति लीटर की बृद्धि किये जाने से देश के ७०% किशानों पर सीधे तौर पर बहुत ही बिपरीत प्रभाव पड़ा है ,तथा आम जनों के जीविका पर,भोजन ,वस्त्र ,आवास पर,बच्चे व बूढों के दूध ,फल व हरी शब्जियों पर ,यात्रा-किराया पर ,अपने तथा अपने बच्चों व बूढ़े-बुजुर्गों के देखभाल व चिकित्सा ब्यवस्था पर व बच्चों के शिक्षा-दीक्षा पर भी मूल्य-बृद्धि का बहुत ही बुरा व प्रतिकूल अशर पडा है .किन्तु हमेशा की तरह इसबार भी ये सरकार पूर्ण बेखबर ही दिखती है .मानो इस सरकार को देस की जनता की परेशानियों से कोई मतलब ही नहीं हो .
इस सरकार के नुमाईंदे को जनता की नहीं बल्कि सरकारी खजाने की चिंता हमेशा ही रहती है ,जबकि बिदेशों में जमा काले धन का उपयोग इस चिंता को दूर करने के लिए काफी है . इस धन की वापसी से इस सरकार के सारे "सरकारी-कोष" के घाटे को दूर करने के साथ-साथ सम्पूर्ण भारत-वर्ष के किसानों के ऊपर का सारा कर्ज भी माफ किया जा सकता है,परन्तु इच्छा शक्ति से कमजोर ये सरकार ऐसा नहीं कर सकती .
यह बात दीगर है की देस के इन्ही ७०%जनता के रहमो-करम पर ये सरकार समय-समय पर बनी भी और इन्ही लोगों के रहमो-करम पर उन्हें जायका भी नशीब होता है . उन्हें शायद यह भी ध्यान होना चाहिए की देस की संसद में बैठे नियमो को बनाने बाले सांसद हों या फिर ऑफिस में फाईल निबटाने बाले बाबू ;देस के बड़े उद्योग पति घराने के लोग मसलन चाहे वो टाटा-बिडला हो या फिर अम्बानी-ग्रुप्स ;मफतलाल हो या आनंद-महिंद्रा ;विजय माल्या हो या फिर जेट एयरवेज के मालिक ;राजधानी एक्सप्रेस से यात्रा करने बाले हों या हवाई जहाज में उड़ान भरने बाले, भब्य और आलिशान बिल्डिंग में रात गुजारने बाले हों या फिर पांच सितारा होटलों का खूब लुफ्त उठाने बाले VIPS , इन सबों के लिए रेस्तरां या ढाबे से आने बाली खूब लजीज जायका भी इन्ही किशानों के खून और पशीना का देन है .
परन्तु बिडम्बना इस बात की है की ,जायका के मालिक को ही जायका से मेहरूम किया जा रहा है .ये निष्ठुर सोनिया जी एवं डॉ. मनमोहन सिंह जी की सरकार के बड़े ही तेज तर्रार वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी भी ऐसे अन्न दाता का ख्याल क्या रखेगी ? की, एक बख्त की थाली ही गायब करबा दी . इस सम्पूर्ण देस से भूख ,भय ,भ्रष्टाचार को मिटाने का नारा बुलंद करने बाली सरकार जिन्हें आज एक अमीरों का भारत और दुसरा गरीबों का भारत दीखता हो और इन दो बर्गों में बटा भारत को देखने बाली ये सरकार महज एक भारत क्या बनाएगी ? बल्कि इसके बदले भूख ,भय ,भ्रष्टाचार, अराजकता और आपातकाल जैसी स्थिति व परिस्थितियां ही पैदा करने लगी . देस में अराजकता और आपातकाल जैसी परिस्थितियां पैदा करने बाली इस सरकार को जड़ से उखाड़ फेंकने की आवश्यकता है .
गोदामों में अनाज सड़ता रहे आदमी भूखा मरता रहे , देश की अकूत संपदा बिदेशी बैंकों में सड़ता रहे और यहाँ ऋण के बोझ तले किसान आत्म हत्या करता रहे ;माननीय सर्वोच्च न्यायलय बार-बार टिप्पणी करता रहे और ये गूंगी व बहरी सरकार सुनती रहे ,ये विषय जितना असम्बेदनशील और आपत्तिजनक है उतना ही "अलोकतांत्रिक" भी . इस सरकार के इस घोर जन-बिरोधी कदम की हम निंदा करते हैं .
इतिहाश गवाह है सत्ता में आने पर सत्ता को बचाने व सत्ता में बने रहने के लिए जब जिस संसोधन की जरुरत महशुस हुयी इस सरकार ने संबिधान के मूल ढांचे में भी परिवर्तन करने से कोई गुरेज नहीं की. भारतीय संबिधान के मूल ढांचे को बिगाड़ने बालों से अथवा संबिधान के महत्व को हल्का करने बालों से हम इस हिदायत के साथ पेट्रोलियम पदार्थों में की गयी मूल्य बृद्धि को तत्काल वापस लेने की अपनी मांग दुहराते हैं की ,सावधान इन गरीब मजदुर किशानों की आह की आग की लपटों में जब पड़ोगे तो फिर एक दिन भी अधिक बच नहीं पाओगे , तेरा सब कुछ राख हो हीं जाएगा .
अब वो दिन दूर नहीं जब आपके तमाम काले करतूतों से पर्दा हटाने के लिए देस में एक नयी किन्तु एक बड़ी क्रांति होगी . देस की ७०%जनता का नेतृत्व इन्ही ईमानदार किशानों के जिम्मे होगा ,देस के तमाम युवा-नौजवान इसमें बानरी सेना की भूमिका में होंगे .और अगर ऐसा हुवा तो देस में अबतक जितने बड़े बदलाव देखे गए इस क्रांति के बाद उन सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा .
संबिधान में किये गए छेड़-छड में सुधार होगा ,आयत-निर्यात के तरीके बदले जायेंगे . भूख मिटाने बालों की श्रेणियाँ होंगी ,मानव और दानव में फर्क दिखेगा ,देस का अपना कानून होगा , और फिर से राम राज्य स्थापित होंगे . काले धन की वापसी होगी और इन गरीब मजदुर किशानों का अपना आशियाना होगा और अपना "मन-पशंद जायका" भी .परन्तु इन काले धन से अपनी भूख मिटाने बालों का न तो ये "जायका" होगा और न हीं ये "राज-गद्दी" .
डॉ.रवीन्द्र कुमार सिंह
जिला प्रवक्ता ,भारतीय जनता पार्टी
सहरसा-जिला, (बिहार)
rabindra2166@gmail.com
dated 25-06-11
पेट्रोलियम मंत्री एस. जयपाल रेड्डी द्वारा शुक्रवार की रात डीजल की कीमत में तीन रूपये प्रति लीटर, कैरोसीन में दो रूपये प्रति लीटर और रसोई गैस की कीमत में 50 रूपये प्रति सिलिंडर की वृद्धि जहाँ घोर जन बिरोधी कदम है,वहीँ इसके साथ ही खाशकर मधयम-वर्गीय लोगो एवं दैनिक मजदूरी कर एक जून की रोटी का जुगाड़ कर जीवन यापन कर रहे गरीब मजदूरों, रिक्शा चालकों ,बुनकर व कुलियों के साथ क्रूर मजाक भी है .
सरकारी कोषों के घाटे को भरने के नाम पर केंद्र की इस लुटेरी U.P.A. सरकार ने इससे पहले तो सबोंके थाली से शब्जी घटाने का काम किया था और अब पुनः इसबार इस बेतहाशा मूल्य बृद्धि कर एक बख्त का भोजन ही गायब कर दिया है .
भ्रष्टाचार की आकंठ में डूबी कालाबाजारियो और पुजीपतियों के बैशाखी पर चलने बाली ये गूंगी व बहरी सरकार देस की जनता का न केवल खूब शोषण किया है बल्कि इनका शोषण कर विदेशी बैंकों में आकूत धन भी जमा किया है .काले धन का पासबुक जमाकर चाहे ये अपने को जितना बड़ा हीं क्यों न समझ ले . देस की जनता इसे बख्सेगी नहीं .अब वो जग चुकी है और इसके काले कारनामे को जान चुकी है .चाहे ये जैसी भी राशलिला क्यों न रच ले देस की जनता इसबार इसे माफ नहीं करेगी .
झूठ के बुनियाद पर टिकी केंद्र की इस लुटेरी U.P.A. सरकार के द्वारा कैरोसीन में दो रूपये प्रति लीटर और रसोई गैस की कीमत में 50 रूपये प्रति सिलिंडर के साथ हीं, डीजल की कीमत में तीन रूपये प्रति लीटर की बृद्धि किये जाने से देश के ७०% किशानों पर सीधे तौर पर बहुत ही बिपरीत प्रभाव पड़ा है ,तथा आम जनों के जीविका पर,भोजन ,वस्त्र ,आवास पर,बच्चे व बूढों के दूध ,फल व हरी शब्जियों पर ,यात्रा-किराया पर ,अपने तथा अपने बच्चों व बूढ़े-बुजुर्गों के देखभाल व चिकित्सा ब्यवस्था पर व बच्चों के शिक्षा-दीक्षा पर भी मूल्य-बृद्धि का बहुत ही बुरा व प्रतिकूल अशर पडा है .किन्तु हमेशा की तरह इसबार भी ये सरकार पूर्ण बेखबर ही दिखती है .मानो इस सरकार को देस की जनता की परेशानियों से कोई मतलब ही नहीं हो .
इस सरकार के नुमाईंदे को जनता की नहीं बल्कि सरकारी खजाने की चिंता हमेशा ही रहती है ,जबकि बिदेशों में जमा काले धन का उपयोग इस चिंता को दूर करने के लिए काफी है . इस धन की वापसी से इस सरकार के सारे "सरकारी-कोष" के घाटे को दूर करने के साथ-साथ सम्पूर्ण भारत-वर्ष के किसानों के ऊपर का सारा कर्ज भी माफ किया जा सकता है,परन्तु इच्छा शक्ति से कमजोर ये सरकार ऐसा नहीं कर सकती .
यह बात दीगर है की देस के इन्ही ७०%जनता के रहमो-करम पर ये सरकार समय-समय पर बनी भी और इन्ही लोगों के रहमो-करम पर उन्हें जायका भी नशीब होता है . उन्हें शायद यह भी ध्यान होना चाहिए की देस की संसद में बैठे नियमो को बनाने बाले सांसद हों या फिर ऑफिस में फाईल निबटाने बाले बाबू ;देस के बड़े उद्योग पति घराने के लोग मसलन चाहे वो टाटा-बिडला हो या फिर अम्बानी-ग्रुप्स ;मफतलाल हो या आनंद-महिंद्रा ;विजय माल्या हो या फिर जेट एयरवेज के मालिक ;राजधानी एक्सप्रेस से यात्रा करने बाले हों या हवाई जहाज में उड़ान भरने बाले, भब्य और आलिशान बिल्डिंग में रात गुजारने बाले हों या फिर पांच सितारा होटलों का खूब लुफ्त उठाने बाले VIPS , इन सबों के लिए रेस्तरां या ढाबे से आने बाली खूब लजीज जायका भी इन्ही किशानों के खून और पशीना का देन है .
परन्तु बिडम्बना इस बात की है की ,जायका के मालिक को ही जायका से मेहरूम किया जा रहा है .ये निष्ठुर सोनिया जी एवं डॉ. मनमोहन सिंह जी की सरकार के बड़े ही तेज तर्रार वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी भी ऐसे अन्न दाता का ख्याल क्या रखेगी ? की, एक बख्त की थाली ही गायब करबा दी . इस सम्पूर्ण देस से भूख ,भय ,भ्रष्टाचार को मिटाने का नारा बुलंद करने बाली सरकार जिन्हें आज एक अमीरों का भारत और दुसरा गरीबों का भारत दीखता हो और इन दो बर्गों में बटा भारत को देखने बाली ये सरकार महज एक भारत क्या बनाएगी ? बल्कि इसके बदले भूख ,भय ,भ्रष्टाचार, अराजकता और आपातकाल जैसी स्थिति व परिस्थितियां ही पैदा करने लगी . देस में अराजकता और आपातकाल जैसी परिस्थितियां पैदा करने बाली इस सरकार को जड़ से उखाड़ फेंकने की आवश्यकता है .
गोदामों में अनाज सड़ता रहे आदमी भूखा मरता रहे , देश की अकूत संपदा बिदेशी बैंकों में सड़ता रहे और यहाँ ऋण के बोझ तले किसान आत्म हत्या करता रहे ;माननीय सर्वोच्च न्यायलय बार-बार टिप्पणी करता रहे और ये गूंगी व बहरी सरकार सुनती रहे ,ये विषय जितना असम्बेदनशील और आपत्तिजनक है उतना ही "अलोकतांत्रिक" भी . इस सरकार के इस घोर जन-बिरोधी कदम की हम निंदा करते हैं .
इतिहाश गवाह है सत्ता में आने पर सत्ता को बचाने व सत्ता में बने रहने के लिए जब जिस संसोधन की जरुरत महशुस हुयी इस सरकार ने संबिधान के मूल ढांचे में भी परिवर्तन करने से कोई गुरेज नहीं की. भारतीय संबिधान के मूल ढांचे को बिगाड़ने बालों से अथवा संबिधान के महत्व को हल्का करने बालों से हम इस हिदायत के साथ पेट्रोलियम पदार्थों में की गयी मूल्य बृद्धि को तत्काल वापस लेने की अपनी मांग दुहराते हैं की ,सावधान इन गरीब मजदुर किशानों की आह की आग की लपटों में जब पड़ोगे तो फिर एक दिन भी अधिक बच नहीं पाओगे , तेरा सब कुछ राख हो हीं जाएगा .
अब वो दिन दूर नहीं जब आपके तमाम काले करतूतों से पर्दा हटाने के लिए देस में एक नयी किन्तु एक बड़ी क्रांति होगी . देस की ७०%जनता का नेतृत्व इन्ही ईमानदार किशानों के जिम्मे होगा ,देस के तमाम युवा-नौजवान इसमें बानरी सेना की भूमिका में होंगे .और अगर ऐसा हुवा तो देस में अबतक जितने बड़े बदलाव देखे गए इस क्रांति के बाद उन सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा .
संबिधान में किये गए छेड़-छड में सुधार होगा ,आयत-निर्यात के तरीके बदले जायेंगे . भूख मिटाने बालों की श्रेणियाँ होंगी ,मानव और दानव में फर्क दिखेगा ,देस का अपना कानून होगा , और फिर से राम राज्य स्थापित होंगे . काले धन की वापसी होगी और इन गरीब मजदुर किशानों का अपना आशियाना होगा और अपना "मन-पशंद जायका" भी .परन्तु इन काले धन से अपनी भूख मिटाने बालों का न तो ये "जायका" होगा और न हीं ये "राज-गद्दी" .
डॉ.रवीन्द्र कुमार सिंह
जिला प्रवक्ता ,भारतीय जनता पार्टी
सहरसा-जिला, (बिहार)
rabindra2166@gmail.com
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