दिग्विजयी नेता स्वर्गीय दिग्विजय सिंह जी वास्तव में नेक और बहुत ही खुले दिल इन्शान थे . उनके बिचार में किन्ही ब्यक्ति द्वारा उनके ऊपर कोई एहशान किये जाने पर उन्हें उनका उपकार मानना चाहिए .वो भुतपूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चंद्रशेखेर जी के एह्शानमंद थे .उनका इनके जीवन पर बड़ा ही कर्ज था .अनुकूल समय आने पर उनके द्वारा एहसान हल्का करने का जो कुछ प्रयास किया वो उनके उच्च मंशिकता को परिभाषित करने के लिए काफी है . वैसे इस प्रयास पर मिली प्रतिक्रया से न केवल स्वर्गीय दिग्विजय सिंह जी बल्कि स्वर्गीय प्रधानमंत्री चंद्रशेखेर जी का भी व्यक्तित्व झलकता है .हुवा ऐसा की दिग्विजयी नेता स्वर्गीय दिग्विजय सिंह जी अपने एहशान को हल्का करने के उधेश्य से स्वर्गीय प्रधानमंत्री चंद्रशेखेर जी से तत्कालीन सताधारी पार्टी के साथ मिलकर आगे बढ़ने का आग्रह ही किया की उसपर स्वर्गीय प्रधानमंत्री चंद्रशेखेर जी ने जो जबाब दिया वास्तव में वो भी काफी प्रेरनादायी है .”बन्स्वाद से उपर राष्ट्रवाद.” इसके अतिरिक्त एक साथ स्टार टीवी और सती प्रथा की कल्पना बिलकुल ब्यर्थ तो है ही .ये बात भी बिलकुल हृदय- स्पर्शी है . मैं ब्याक्तिगत रूप से उनके इन विचारों से सहमत हूँ . उनके ये विचार अनुकरणीय हैं. हमेसा याद रखे जायेंगे दोनों ही बिभूति अपने कृत्य और अपने उत्तम विचारों के लिए . अपनी और से अपनी श्रन्धांजलि न केवल स्वर्गीय दिग्विजय सिंह जी को बल्कि दोनों ही दिवंगत नेता को उनके विचारों को आत्मसात कर ! ….
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